हालिया चुनावों में भाजपा ने जीत हासिल की है. 325 रिकॉर्ड सीटें भी भाजपा गठबंधन के खाते में आई हैं. चुनाव परिणाम के बाद हफ्ते भर तक पार्टी के अन्दर मुखिया को लेकर मशक्कत चलती रही. अन्ततोगत्वा उन्हें गहरे समंदर में गोते लगाकर एक नाम की प्राप्ति हुयी- योगी आदित्यनाथ. योगी आदित्यनाथ के मुख्यमंत्री की शपथ लेने से पहले सोशल मीडिया पर लोगों की रायशुमारी आम होने लगी.

रामराज पुराना हुइ गा, अब तो पांडवराज लाने वाले हैं विधायक जी!

मुख्यमंत्री की शपथ से पहले

जैसे ही इस नाम की घोषणा हुयी, ट्वीटर पर उनका नाम ट्रेंड करने लगा. लोगों का क्या है वे तो राय देने में माहिर हैं सो सबने अपनी-अपनी राय देनी शुरू कर दी. भइया कुछ ने उनका पक्ष लिया तो कुछ साहबान सामने वाली कतार में खड़े हो गये.


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उनके मुख्यमंत्री बनने पर कैसी-कैसी लोगों ने बातें कही हैं, आइये हम आपको विस्तार से बताते हैं.

रजनी पाटिल के अकाउंट से मीडिया पर तंज कसते हुए लिखा गया है कि,’मीडिया की सोंच साल दर साल किस तरह की बदलती रही है. इसके साथ इन्होंने एक फोटो भी डाला है, जिसमें साल 2009 से लेकर साल 2017 तक की तस्वीरों में अटल बिहारी बाजपेई, लाल कृष्ण आडवाणी, नरेन्द्र मोदी और योगी आदित्यनाथ की तस्वीरे हैं. इस तस्वीर के माध्यम से सेकुलर और कम्युनल की मीडिया की धारणा इन्होंने समझाई है.

सिद्धार्थ बाबू ने योगी के सपोर्ट में लिखा है,’कि यूपी को एक मज़बूत निर्णय लेने वाले सीएम की ज़रूरत थी, ऐसे में योगी राईट चॉइस हैं. इन्होंने निशार खान की पोस्ट को अपने ट्विटर अकाउंट से शेयर किया है.

चेतन भगत इस पर अपनी राय रखते हुए लिखते हैं,’चूंकि ये देखना भी ज़रूरी है कि कोर क्या चाहता है, और बीजेपी को बेस पसंद है.’

बरखा दत्त ने अपनी प्रतिक्रिया में नरेन्द्र मोदी का बढ़ता हुआ कद तो बताया लेकिन उदारवादी नीति के स्तर में गिरावट की बात करते हुए ट्वीट किया है.

लोग तो ठहरे रायबहादुर और भई अपनी राय रखना भी सबका जन्मसिद्ध अधिकार है, तो राय रखते रहिये और शपथ-ग्रहण कार्यक्रम देखते रहिये.

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