भाजपा वैसे भी रामराज की पक्षधर रहती है, लेकिन लगता है इस बार इरादे पांडवराज के हैं. भई विधायकवाणी से तो यही लग रहा है. सूबे में भारतीय जनता पार्टी की नई सरकार बनी है. सीटें भी खूब 325 इनके हिस्से आयी हैं. इन्हीं में से एक का नाम देवबंद विधानसभा है. यहाँ के नवनिर्वाचित विधायक बृजेश सिंह की चाहत है कि इस विधानसभा सीट का नाम देवबंद की बजाय देव वृंद कर दिया जाए. अब साहब मुखिया हैं जो कहेंगे मानना पड़ेगा.

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देवबंद विधानसभा बदलेगा नाम

दरअसल इनका मानना है कि,’देवबंद की पहचान मुस्लिमों से ज्यादा महाभारत काल से जुड़ा है. विधायक जी कहते हैं कि ये क्षेत्र देवबंद की बजाय हमेशा से देव वृंद के नाम से ज्यादा मशहूर रहा है.’


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उनका कहना है कि,’यहाँ पर महाभारत की राखहांडी है, यहीं पर पाँचों पांडवों ने पूजा की थी. यही जरवाला है जो असल में यक्षवाला है. यहीं पर यक्ष-युधिष्ठिर का सवाल जवाब किये थे.’

दरअसल देवबंद सहारनपुर जिले की एक विधानसभा है. यहाँ कुल आबादी का 65 प्रतिशत मुसलमान हैं. बृजेश ने बसपा प्रत्याशी माजिद अली को 29,415 वोटों से हराकर विधायकी हासिल की है. वे कहते हैं कि,’बिना मुस्लिम आबादी के समर्थन और उनके पक्ष में वोटिंग के उनकी जीत असंभव थी. मुस्लिम बहनों ने ट्रिपल तलाक के मसले पर भाजपा के पक्ष में मतदान किया है. उनका कहना है कि मुस्लिम बहनें मोदी जी के साथ हैं. वे भी चाहती हैं कि ट्रिपल तलाक बंद हो.’

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दरअसल देवबंदी आन्दोलन की शुरुआत 1857 के स्वतंत्रता संग्राम के बाद हुयी थी.इस्लामिक विद्वान शाह वलीउल्ला देहवाली ने इसकी शुरुआत की थी. उनका कहना था मुस्लिम समाज पथ से भटक गया है. यही मुस्लिमों के पतन का कारण है.

इस सीट पर 2002 के बाद से लगातार सपा और बसपा का कब्ज़ा रहा है. 199 3 और 1996 में यहाँ भारतीय जनता पार्टी ने भी विजयश्री पायी है. इससे पहले तक इस सीट पर कांग्रेस की मज़बूत पकड़ रही है. इस बार फिर से भाजपा का परचम यहाँ बुलंद हुआ है.

विधायक बनते ही एक होली पार्टी में विधायक जी ने सीट का नाम बदलने की अपनी मंशा ज़ाहिर कर दी है.

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वैसे लोग दबी जुबान में कह रहे हैं विधायक जी! नाम बदलने के अलावा करने को काम और भी हैं. विधायक जी ने सुना तो अच्छा, न सुना तो और अच्छा.

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