जर्मनी की एक राजनीतिक पार्टी ने अगर एडोल्फ हिटलर को सदस्यता दे दी होती, तो शायद दुनिया में ‘हिटलर’ का उदय नहीं होता। द्वितीय विश्वयुद्ध की परिस्थितियां भी पैदा न होंती। यह दावा अबेरदीन यूनिवर्सिटी के प्रोफेसर थॉमस वेबर ने अप्रकाशित ऐतिहासिक दस्तावेजों के हवाले से किया है।

1919 बनी सोशलिस्ट पार्टी

थॉमस के हाथ लगे दस्तावेजों के मुताबिक 1919 में जर्मन सोशलिस्ट पार्टी का गठन हुआ। इस पार्टी ने हिटलर को सदस्यता देने से न केवल इनकार किया, बल्कि कहा कि न तो उसकी पार्टी में और न ही पार्टी के मुखपत्र में उसकी जरूरत है।

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इसलिए कुछ नहीं करता हिटलर

उन्होंने कहा, अगर हिटलर को सोशलिस्ट पार्टी की सदस्यता मिल गई होती, तो शायद वह दूसरा रास्ता अख्तियार करता। प्रोफेसर थॉमस ने कहा, सोशलिस्ट पार्टी उस समय नाजी पार्टी के मुकबाले कहीं अधिक बड़ी और सफल थी।

आदेशों के पालन में ही था खुश

ऐसी स्थिति में पार्टी में हिटलर को छोटी जिम्मेदारी मिलती और शायद ही वह इतना तकतवर हो पाता। यहां तक कि नाजी पार्टी के शुरुआती दिनों में भी उसमें नेतृत्व क्षमता देखने को नहीं मिली और वह आदेशों का अनुपालन करके ही खुश था।

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1920 में नाजी पार्टी में शामिल

उन्होंने कहा कि सोशलिस्ट पार्टी से दुत्कार की वजह से वह 1920 में नाजी पार्टी में शामिल हुआ और 1921 में नेता बना। इसी साल सोशलिस्ट पार्टी को भंग कद दिया गया। थॉमस ने यह दावा सोशलिस्ट पार्टी के संस्थापक हैंस जॉर्ज ग्रेसिंगर के बयान संबंधी दस्तावेज के हवाले से किया है।

इस तरह से हिटलर को किया मना

यह दस्तावेज म्यूनिख स्थित इंस्टीट्यूट ऑफ कांटेम्परोरी हिस्ट्री में सुरक्षित है। इसके मुताबिक 1919 के जाड़े में हिटलर पार्टी के प्रकाशन गृह में ग्रेसिंगर से मिलने आया। उसने मुखपत्र के लिए लिखने और पार्टी में शामिल होने की पेशकश की। हिटलर के पास उस समय कोई धनराशि नहीं थी इसपर ग्रेसिंगर ने कुछ राशि उधार दी। साथ ही कहा कि उसके लिए कोई जगह नहीं है।

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