विचारधारा व्यक्ति पर हमेशा हावी रहती है. कुमार विश्वास अक्सर देश की बात आने पर पीएम मोदी और भाजपा का समर्थन करते नज़र आये हैं. देश के मुद्दे पर वे आम आदमी पार्टी के नेता से ज़्यादा एक कवि दिखाई देते हैं. यही कारण हैं कि कभी कभी उनके बयान पार्टी लाइन से हटकर हो जाते हैं जो आम आदमी पार्टी के लिए मुसीबत खड़ी करते हैं. जब कुमार विश्वास से प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के बारे में पूछा गया तो खुलेआम उन्होंने इस बात को स्वीकार किया कि पीएम मोदी से उनके निजी रिश्ते हैं, लेकिन भाजपा में जाने का उनका कोई विचार नहीं है. उन्होंने तो यहाँ तक कह दिया कि अगर राजनीति करेंगे तो आम आदमी पार्टी की, वरना राजनीति छोड़ देंगे.

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कुमार विश्वास जायेंगे राज्यसभा

कुमार विश्वास


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पार्टी की ओर से राजस्थान का प्रभारी बनाये जाने के सवाल पर उनका कहना था कि पार्टी को उनका इस्तेमाल राष्ट्रीय स्तर पर करना चाहिए. राज्यसभा संसद का उच्च सदन है. उनमें वह क्षमता है कि वे सदन में जनता की आवाज़ को दमदार तरीके से पेश कर सकते हैं. इसलिए आम आदमी पार्टी को अपने कोटे से उन्हें राज्यसभा भेजना चाहिए. किसी एक राज्य का मात्र प्रभारी पद नहीं देना चाहिए था. उनका पूरा इस्तेमाल पार्टी राष्ट्रीय राजनीति के लिए कर सकती है. इसके बावजूद राजस्थान का प्रभारी बनाये जाने पर वहां पार्टी खड़ी करने के लिए वे पूरी ताकत लगा रहे हैं. उनका विश्वास है कि राजस्थान में आगामी चुनाव में आम आदमी पार्टी बढ़िया प्रदर्शन करेगी.

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अमेठी चुनाव नहीं चाहते थे लड़ना

बारादरी की बैठक में उन्होंने यह भी कहा कि अमेठी में चुनाव वे नहीं लड़ना चाहते थे, लेकिन पार्टी पर कांग्रेस की बी टीम की तरह काम करने का आरोप लग रहा था, इसलिए पार्टी के दबाव के तहत उन्हें चुनाव लड़ना पड़ा था. केजरीवाल से अपने रिश्तों में आई खटास के सवाल पर कुमार का कहना है कि निजी रिश्तों की चर्चा सार्वजनिक मंच पर नहीं होनी चाहिए.

साथ ही उन्होंने ये भी कहा कि केजरीवाल से उनके रिश्तों में मिठास और तल्खी का सिलसिला आंदोलन के दिनों से चलता आ रहा है. पार्टी में बाहर से आए कुछ पैराशूटर्स को उनका बेबाकी वाला अंदाज़ पसंद नहीं आता. उनका कहना है कि ‘बैक टू बेसिक्स’ का जो उन्होंने नारा दिया था वह लोगों को पसंद नहीं आता, लेकिन इस सबसे उन्हें कोई फर्क नहीं पड़ता.

कुमार का यह भी कहना है कि सत्ता में आने के बाद आम आदमी पार्टी के तेवर और कलेवर में बदलाव आया है. चूंकि आगामी नवंबर में पार्टी की स्थापना के पांच साल पूरे हो रहे हैं, इसलिए वे जरूर कोशिश करेंगे कि इस दरम्यान पीछे छूट गए लोगों को, बिछड़ गए लोगों को पार्टी से जोड़ सकें.

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उन्होंने पंजाब चुनाव की हार को स्वीकार करते हुए कहा कि गलतियां हुर्इं, इसीलिए हम चुनाव हारे. पंजाब की हार के बावजूद पार्टी के दूसरे राज्यों में विस्तार की योजना उचित है. अगर हम पंजाब जीत गए होते तो आज इस तरह का कोई सवाल ही नहीं होता.

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