हिमाचल प्रदेश में कांग्रेस के बाद भाजपा ने भी अपने पुराने खिलाड़ी पर ही दांव लगाया है। अब एक तरफ कांग्रेस के 83 साल के वीरभद्र सिंह और दूसरी ओर भाजपा के 73 साल के प्रेम कुमार धूमल हैं। ये दोनों की राजनीति के पुराने महारथी हैं।

अमित शाह ने की घोषणा

हिमाचल प्रदेश के लिए प्रेम कुमार धूमल के नाम की घोषणा भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष अमित शाह ने मंगलवार को की। उन्होंने राजगढ़ रैली में यह ऐलान करके सियासी संशय खत्म कर दिया।

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27 साल से लड़ रहे दोनों

27 सालों से हिमाचल की सियासी लड़ाई वीरभद्र सिंह और प्रेम कुमार धूमल के बीच ही लड़ी जा रही है। वीरभद्र सिंह के पास छह बार सूबे का मुख्यमंत्री बनने का रिकॉर्ड है। उनके अलावा और कोई दो बार से ज्यादा सीएम नहीं रहा।

शाही परिवार से हैं वीरभद्र

शाही परिवार से संबंध रखने वाले वीरभद्र सिंह को ‘पहाड़ों का राजा’ भी कहा जाता है। वह प्रदेश में कांग्रेस के संभवत: इकलौते सर्वमान्य नेता हैं। 2012 में शिमला ग्रामीण से सभी को गलत साबित करते हुए चुनाव जीता।

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दो बार सीएम रहे धूमल

दूसरी ओर प्रेम कुमार धूमल दो बार मुख्यमंत्री बन चुके हैं। धूमल के सांसद बेटे अनुराग ठाकुर की भी अच्छी पकड़ है। एक बात और है जो वीरभद्र और धूमल में कॉमन है, वह है कि दोनों पर ही भ्रष्टाचार के आरोप हैं।

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