सियासत में न तो कोई किसी का दुश्मन होता या न ही दोस्त या रिश्तेदार। मध्य प्रदेश का सिंधिया घराना इसका बड़ा उदाहरण है। माधवराव सिंधिया कांग्रेसी थे तो उनकी मां महारानी विजयराजे सिंधिया भाजपाई। बहन वसुंधरा राजे राजस्थान में भाजपा की सीएम हैं।

वीरभद्र सिंह की ससुराल वाले भाजपा में

कुछ ऐसा ही हाल हिमाचल प्रदेश में भी है। वीरभद्र सिंह हिमाचल प्रदेश के सबसे लंबे समय तक मुख्यमंत्री रहे हैं। वह पांच बार करीब 22 साल तक राज्य के मुखिया की जिम्मेदारी संभाल चुके हैं। दूसरी ओर, उनकी ससुराल के सारे लोग भाजपाई हैं।

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दो साले हैं मुख्यमंत्री वीरभद्र सिंह के

वीरभद्र सिंह की पत्नी का नाम प्रतिभा सिंह है। प्रतिभा सिंह के बड़े भाई हैं वीर विक्रम सेन और छोटे भाई हैं पृथ्वी विक्रम सेन। ये सभी राजघराने से ताल्लुक रखते हैं। शुरू में ये दोनों भी कांग्रेसी थे।

2012 में कांग्रेस से की थी बगावत

कांग्रेस में उचित सम्मान नहीं मिलने पर वीर विक्रम सेन ने 2012 के विधानसभा चुनाव में पत्नी विजय ज्योति सेन को वीरभद्र सिंह की इच्छा के खिलाफ शिमला के कुसुम्पटी क्षेत्र से निर्दलीय उम्मीदवार के तौर पर मैदान में उतार दिया। हालांकि, वह चुनाव हार गईं।

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2015 में ही भाजपा में हो गए शामिल

इस बगावत करने के बावजूद वीर विक्रम सेन को कांग्रेस से नहीं निकाला गया। वह कुसुम्पटी ब्लॉक के कांग्रेस अध्यक्ष बने रहे। हाल ही में उन्होंने भाजपा से नजदीकियां बढ़ा लीं।सीएम वीरभद्र सिंह के छोटे साले पृथ्वी विक्रम सेन 2015 में ही भाजपा में शामिल हो चुके हैं।

सीएम की सलहज को बनाया प्रत्याशी

पृथ्वी विक्रम सेन भाजपा की तरफ से कुसुम्पटी विधानसभा क्षेत्र से उम्मीदवारी के दावेदार थे। पर भाजपा ने उनकी भाभी विजय ज्योति सेन को कुसुम्पटी का प्रत्याशी बनाया है। विजय ज्योति सेन वहां से चुनाव लड़ चुकी हैं, इसलिए पार्टी ने उन पर भरोसा किया है।

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