मुंबई: आज के दौर में किसी भी चीज़ के ज्यादा टिकाऊ होने की गारंटी होना मुश्किल है. अगर आप इसके प्रति ज्यादा ही आश्वस्त हैं तो भइया चादर तानो और सो जाओ, क्योंकि दुकानदार भी दुकान में लिख के रखता है कि, ‘फैशन के दौर में कृपया गारंटी की इच्छा न करें.’ अब पेटीएम की ऑनलाइन राजा की दावेदारी को ही ले लीजिये. शायद ज्यादा दिन अब ये न टिक पाए. मेड इन इंडिया की इस कंपनी को विलायत की एक बड़ी कंपनी से टक्कर मिल सकती है.

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क्या होगा पेटीएम का और कैसे?

अंग्रेजी अख़बार इकनोमिक टाइम्स के सूत्रों के अनुसार भारत की ऑनलाइन मार्केटप्लेस की कंपनी स्नैपडील एलोन मस्क द्वारा स्थापित यूएस की ऑनलाइन भुगतान की सर्विस पेपल को अपनी ऑनलाइन भुगतान की सर्विस फ्रीचार्ज बेच सकती है.


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अगर ऐसा होता है तो इस डील की कीमत 500 मिलियन डॉलर तक हो सकती है, जो कि स्नैपडील की फ्रीचार्ज की 400 मिलियन डॉलर की खरीद से 100 मिलियन डॉलर ज्यादा है.

एक ऐसे समय जब फ्लिप्कार्ट और स्नैपडील जैसे दिग्गज इन्वेस्टर्स से फंड्स के भूखें हैं, ऐसे में इस डील के होने का मतलब ये होगा कि स्नैपडील खुद को ऑनलाइन मार्केटप्लेस में काफी सहज महसूस करेगी.

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स्नैपडील के एक बड़े इन्वेस्टर जैसपर इंफोटेक काफी लम्बे समय से स्नैपडील के ऑनलाइन भुगतान के प्लेटफार्म के लिए इन्वेस्टर की तलाश में थे जो शायद अब ख़त्म हो सकती है.

इन दिनों फ्लिप्कार्ट की तर्ज़ पर स्नैपडील भी अपनी सीनियर मैनेजमेंट से काफी व्यक्तियों को खो रही है. हाल ही में फ्रीचार्ज के चीफ एग्जीक्यूटिव गोविन्द रंजन इसका प्रमुख उदहारण हैं. उनके जाने की वजह फ्रीचार्ज को पेपल को बेचना और फंड्स की किल्लत मानी जाती है.

हालाँकि स्नैपडील ने इस मुद्दे पर कोई भी टिपण्णी करने से मना कर दिया है. आपको बता दें कि हाल ही में कंपनी को मुनाफे में लाने के लिए स्नैपडील ने सैकड़ों लोगों की नौकरियां भी ले लीं थी.

पेपल की सीनियर मैनेजमेंट भी भारत में व्यवसाय करने में बेहद रूचि दिखा रही है. हालाँकि पेपल की पकड़ भारत में अभी उतनी अच्छी नहीं है, लेकिन अभी भी बेंगलुरु और चेन्नै में मिलाकर उसके 1,300 कर्मचारी हैं.

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