राम रहीम और हनीप्रीत भले जेल में हों, लेकिन इनके कारनामों के खुलने का सिलसिला जारी है. अब तक यही पता चला था कि बाबा के डेरे में अपने सिक्के चलते थे जिनका इस्तेमाल बाबा के भक्त करते थे. लेकिन अब इससे एक कदम आगे बढ़ते हुए जो बात सामने आई है वो चौंकाने वाली है. दरअसल राम रहीम केवल अपने सिक्के नहीं चलवाता था, बल्कि एक पूरा बाबा का बैंक था और बाबा के इस बैंक की मैनेजर हनीप्रीत थी. लेकिन दोनों के सलाखों के पीछे जाते ही ये कारोबार बंद हो गया. हाल ही में इससे जुड़े दस्तावेज पंचकुला पुलिस के हाथ लगे हैं.

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बाबा का बैंक बांटता था लोन

बाबा का बैंक


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दरअसल पंचकुला पुलिस को डेरे और गुरुसर मोडिया में जो भी दस्तावेज मिले थे वे उसने प्रवर्तन निदेशालय को सौंपे हैं. इन दस्तावेजों में दूसरे दस्तावेजों के साथ लोगों से लेन-देन के दस्तावेज भी मौजूद हैं, जो इस बात को साफतौर पर बता रहे हैं कि राम रहीम ब्याज पर लोगों को लोन बांटता था. इसके बदले में ब्याज के रूप में मोटी रकम इन लोगों से वसूल करता था.

बाबा अपने भक्तों पर सत्संग की कृपा के साथ लोन की बारिश भी करता था और ब्याज के साथ इस पैसे की वसूली होती थी. यानी राम रहीम को पैसों का इतना लालच था कि वह केवल मनी लॉन्ड्रिंग नहीं बल्कि बल्कि साहूकार का भी काम करता था. बड़ी बात ये है कि बाबा की इस धन उगाही की मैनेजर राम रहीम की चहेती हनीप्रीत बनती थी.

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साथ राज्यों में है संपत्ति

पुलिस ने जो कागज़ प्रवर्तन निदेशालय को सौंपे हैं उनमें डेरे की संपत्तियों के साथ लेन-देन के कागजात भी शामिल हैं. जो कागज़ बरामद हुए हुए हैं, इनके अनुसार बाबा की संपत्ति हरियाणा के 11 जिले और 7 राज्यों में है. इसके अलावा प्रवर्तन निदेशालय ने हरियाणा विकास प्राधिकरण को पत्र लिखकर राम रहीम के नाम अलाट की गई साइट्स की जानकारी भी मांगी है. हरियाणा के अलावा राम रहीम ने पंजाब, दिल्ली, हिमाचल प्रदेश और राजस्थान सहित कई राज्यों में संपत्ति खरीदी है.

ज़मीन की खरीदारी में राम रहीम बहुत चालाकी करता था. डेरे के कुछ पूर्व सेवादार बताते हैं कि राम रहीम अपने अनुयायियों से सस्ते दामों में ज़मीन खरीदकर खुद डेरे को उसे ऊंचे दामों में बेचता था. पुलिस को जो दस्तावेज मिले हैं उनमें ज़मीन की खरीद के लिए दिए गए पैसे और विश्वासपात्रों के नाम से बनाई गई फार्मों के फर्जी बिल और लेन-देन के कागज़ भी इसमें शामिल हैं.

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इसके अलावा हरियाणा पुलिस ने प्रवर्तन निदेशालय को जो हार्ड डिस्क सौंपी है उसमें भी लेन-देन की जानकारियाँ हैं. इन सारे दस्तावेजों की जांच पड़ताल के लिए जल्द ही राम रहीम और हनीप्रीत को निदेशालय बुला सकता है.

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