वन विभाग इन दिनों जबरदस्‍त टेंशन के दौर से होकर गुजर रहा है। दरअसल मध्य प्रदेश में बाघों की मौत की बढ़ती संख्या पर वन्यजीव कार्यकर्ताओं ने चिंता जताई है हालांकि सरकारी अधिकारियों ने कहा कि बाघों की आबादी में सुधार हुआ है और इनके शिकार की घटनाओं को गंभीरता से लिया जा रहा है.

कार्यकताओं ने दी है जानकारी
कार्यकर्ताओं ने कहा कि सभी राज्यों में मध्य प्रदेश में बाघों की मौत की घटनाएं सर्वाधिक दर्ज की गई हैं जबकि वन विभाग के अधिकारियों ने जोर दिया कि राष्ट्रीय पशु के संरक्षण में उनकी ओर से कोई लापरवाही नहीं हुई.


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रिपोर्ट में आया सामने
अजय दूबे नामक एक कार्यकर्ता ने पिछले दो साल में रिपोर्ट की गई बाघों की मौत के संबंध में जांच की मांग को लेकर निर्देश जारी करने के लिए अब मध्य प्रदेश हाई कोर्ट का रुख किया है.

सूत्रों ने दी जानकारी
सूत्रों के अनुसार शिकार और अन्य कारणों से पिछले 13 महीने में राज्य में 32 बाघों की मौत हो गई, जबकि एक जनवरी, 2018 से अब तक छह बाघों की मौत हो चुकी है.

98 बाघों की मौत
राष्ट्रीय बाघ संरक्षण प्राधिकरण (एनटीसीए) के आंकड़े के अनुसार वर्ष 2017 में भारत में 98 बाघों की मौत हुई, जिनमें से 26 मध्य प्रदेश से रिपोर्ट की गई. मध्य प्रदेश वन विभाग के आंकड़े के अनुसार वर्ष 2016 में राज्य में 33 बाघों की मौत हुई.

ऐसी भी दी जानकारी
दूबे ने कहा, ‘वर्ष 2016 से बाघों की मौत के सिलेसिले में जांच के लिए हमलोग हाई कोर्ट का रुख करने जा रहे हैं. मध्य प्रदेश में वर्ष 2016, 2017 में बाघों की मौत की सर्वाधिक संख्या दर्ज की गई और सिर्फ जनवरी में ही अब तक छह बाघों की मौत हो चुकी है.’ उन्होंने कहा कि हाल में होशंगाबाद स्थित सतपुड़ा बाघ संरक्षण में एक रेडियो कॉलर बाघिन का शिकार हुआ था. बाघिन का शव 18 जनवरी को एक रेस्ट हाउस के निकट मिला था.

इन्‍होंने बताया ऐसा
हालांकि सतपुड़ा बाघ संरक्षण के क्षेत्र निदेशक एल कृष्णमूर्ति ने कहा कि सात साल की बाघिन की मौत की जांच की जा रही है और अभी यह कहना जल्दबाजी होगी कि उसका शिकार हुआ था. बहरहाल मध्य प्रदेश के प्रधान मुख्य वन संरक्षक (वन्यजीव) जितेंद्र अग्रवाल ने कहा कि जब भी शिकार की घटनाएं प्रकाश में आती हैं तो त्वरित कार्रवाई की जाती है.

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