हैंडसम हंक ऋतिक रोशन ‘क्रिश’ और ‘काबिल’ जैसी मूवीज करने के बाद अब मैथ्स के टीचर बनेंगे. वो गणित के जीनियस आनंद कुमार की बायोपिक सुपर-30 में काम करने वाले हैं. इस फिल्म के ज़रिये आनंद कुमार की निजी ज़िन्दगी कि झलकियाँ दिखाई जाएंगी. किस तरह उन्होंने 30 गरीब होनहार बच्चों को आईआईटी के लिए ट्यूशन क्लासेज दीं. आर्थिक तंगी के चलते आनंद कुमार पापड़ बेचा करते थे. इसके बावजूद कैसे उन्होंने अपना मुकाम हासिल किया और नाम रोशन किया.

आनंद कुमार देश-विदेश में जाना माना चेहरा हैं. सुपर 30 के संस्थापक आनंद कुमार पटना में गरीब छात्रों को आईआईटी की एंट्रेंस एग्जाम की कोचिंग देने के लिए मशहूर हैं. आनंद कुमार ने गरीब बच्चों के सपनों की उड़ान को पंख दिए.


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आनंद कुमार का जन्म पटना में हुआ था. स्कूल के दिनों से ही उन्हें मैथ से काफी लगाव रहा है. 1994 में उन्होंने कैंब्रिज यूनिवर्सिटी में दाखिला मिला. लेकिन आर्थिक तंगी की वजह से उनके हाथों से यह अवसर निकल गया. पैसों की तंगी के चलते आनंद कुमार ने अपनी मां के साथ शाम में पापड़ बेचना शुरू कर दिया. ताकि वह थोड़ा एक्स्ट्रा पैसा कमा सके.

विदेशी पत्रिकाओं के लिए वह हर हफ्ते पटना से बनारस जाया करते थे. इन पत्रिकाओं की वजह से वह बनारस हिंदू विश्वविद्यालय (BHU) जाते थे.

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आनंद कुमार ने रामानुजन स्कूल ऑफ मैथमैटिक्स शुरू किया था. जहां वह कम फीस पर बच्चों को एंट्रेंस एग्जाम के लिए तैयार करते थे. इसके बावजूद कुछ बच्चे ऐसे भी थे, जो फीस नहीं दे पाते थे. इस बात को ध्यान में रखते हुए ही आनंद कुमार ने सुपर-30 की स्थापनी की.

सुपर-30 एक एजुकेशनल प्रोग्राम है, जहां 30 गरीब और होनहार बच्चों को मुफ्त में आईआईटी के लिए कोचिंग दी जाती है. इन सुपर-30 बच्चों को फ्री कोचिंग के अलावा, उनके रहने और खाने की व्यवस्था भी होती है. बच्चों के लिए आनंद कुमार की मां जयंती देवी खाना बनाती हैं.

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