अगर आप भागदौड़ भरी जिंदगी में व्यायाम से दूर रहते हैं तो आपका मिजाज बिगड़ सकता है। खासकर युवाओं पर इसका बुरा प्रभाव पड़ता है। हफ्ते में तीन बार से कम मीट खाने और कम व्यायाम करने वाले युवा वयस्कों में मानसिक तनाव होने का खतरा बढ़ जाता है।

कार्बोहाइड्रेट के प्रति संवेदनशील

शोधकर्ताओं ने पाया कि युवा वयस्कों (18-29 साल के) का मिजाज ऐसे भोजन पर निर्भर होता प्रतीत होता है जो न्यूरोट्रांसमिटर प्रकर्सर की उपलब्धता एवं सांद्रता बढ़ाते हैं। वहीं, वयस्कों (30 साल से ज्यादा) की मानसिक सेहत कॉफी और कार्बोहाइड्रेट के नियमित सेवन के प्रति ज्यादा संवेदनशील प्रतीत होती है।

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बिंगहैम्टन यूनिवर्सिटी का शोध

अमरीका की बिंगहैम्टन यूनिवर्सिटी की लीना बेगडेक ने बताया कि युवा वयस्कों का मिजाज मस्तिष्क रसायनों में इजाफे के प्रति संवेदनशील प्रतीत होता है। बेगडेक ने कहा कि मीट का नियमित सेवन दो तरह के मस्तिष्क रसायनों (सेरोटोनिन और डोपामाइन) में इजाफा करता है, जो मिजाज अच्छा करने के लिए जिम्मेदार होता है। नियमित व्यायाम इनमें और अन्य न्यूरोट्रांसमिटर में वृद्धि करता है।

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तीन बार से कम व्यायाम तो तनाव

उन्होंने कहा कि दूसरे शब्दों में कहें तो युवा वयस्क जो हफ्ते में तीन बार से कम मीट का सेवन करते हैं और तीन बार से कम व्यायाम करते हैं उनमें अधिक मानसिक तनाव देखा गया। परिपक्व वयस्कों का मिजाज उन भोजन (फल) पर ज्यादा निर्भर होता है जो एंटीऑक्सिडेंट की उपलब्धतता को बढ़ाते हैं।

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