उज्जैन के विश्वप्रसिद्ध महाकाल मंदिर में स्थापित शिवलिंग का जलाभिषेक करने के लिए अब सिर्फ आरओ के पानी का इस्तेमाल होगा। सुप्रीम कोर्ट ने चढ़ावे से शिवलिंग का आकार छोटा होने पर यह आदेश दिया।

पहली बार नहीं लगाई गई है रोक

ऐसी रोक पहली बार नहीं लगी है। महाकाल के लिए अलावा देश के कई और ज्योतिर्लिंग में लगातार क्षरण के कारण दूध और जल तथा अन्य तरीकों से अभिषेक पर पहले से ही रोक है। 12 ज्योतिर्लिंगों में से 7 मंदिरों में दूध-पंचामृत आदि से अभिषेक नहीं हो सकता।

सुप्रीम कोर्ट का एक और अहम फैसला, निजता का अधिकार है मौलिक अधिकार


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कोर्ट ने याचिका पर कराई थी जांच

उज्जैन की सारिका गुरु की याचिका पर कोर्ट ने जियोलॉजिकल सर्वे ऑफ इंडिया और आर्कियोलॉजिकल सर्वे ऑफ इंडिया की देहरादून, भोपाल और इंदौर की टीमों से शिवलिंग के क्षरण की जांच कराई थी। इसी रिपोर्ट के आधार पर फैसला सुनाया।

आधा लीटर ही चढ़ा सकते जल

जस्टिस अरुण मिश्रा की पीठ ने शुक्रवार को कहा कि महाकाल पर सिर्फ आधा लीटर जल ही चढ़ाया जा सकेगा। यही नहीं, आर्कियोलॉजिकल सर्वे ऑफ इंडिया ने कहा कि भस्म आरती में गोबर कंडे की भस्म चढ़ाई जाती है, जो शिवलिंग में क्षरण का मुख्य कारण है।

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फूलमाला से भी हो रहा क्षरण

यही नहीं, शिवलिंग पर जो जल चढ़ाया रहा है, उसमें बैक्टीरिया हैं। इसलिए पानी की मात्रा को कम किया जाए। रिपोर्ट में यह भी कहा गया है कि दूध, दही, घी, शहद, शक्कर और फूलमाला से भी शिवलिंग का क्षरण हो रहा है।

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