आज विश्व जल दिवस है. यह पानी बचाने का संकल्प का दिन है, पानी के महत्व को जानने का दिन है और इसके संरक्षण के लिए समय रहते सचेत होने का दिन है. लेकिन, शायद ही लोग इसके प्रति सचेत हैं. आज दुनिया के ऊपर जल संकट मंडरा रहा है. दुनिया में 84.4 करोड़ लोगों के पास स्वच्छ जल की सुविधा नहीं है. वहीं, भारत में 16.3 करोड़ लोगों को शुद्ध पानी नहीं मिलता है. घटते भूजल स्तर एवं प्रदूषण भारत के लिए सबसे बड़ी चुनौती है. जलसंकट से जूझ रहे दुनिया के दस शहरों में भारत का बेंगलुरु भी है. यहां 2030 तक स्थिति भयावह हो जायेगी. सेंटर फॉर सांइस की ‘डाउन टू अर्थ’ रिपोर्ट में बेंगलुरु को भारत का केपटाउन बताया गया है.

जल संकट

-84.4 करोड़ लोगों के पास स्वच्छ जल की सुविधा नहीं है दुनिया भर में. इन शहरों पर मंडरा रहा जल संकट : बीजिंग, मैक्सिको सिटी, नैरोबी, कराची, काबुल, इस्तांबुल.


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हो जाइए सावधान, बोतल बंद पानी में हैं माइक्रोप्लास्टिक

-अपने देश में शुद्ध पेयजल करीब 7.5 करोड़ लोगों की पहुंच से दूर है. गंदे पानी से होनेवाली बीमारियों के चलते हर साल भारत में करीब 1.4 लाख बच्चे मारे जाते हैं. प्रति व्यक्ति आय के हिसाब से भारत में लोग 17 फीसदी पैसा पानी पर खर्च करते हैं.

-भारत में प्रति व्यक्ति के हिसाब से सालाना पानी की उपलब्धता में तेजी से गिरावट हो रही है. 2001 में यह 1,820 क्यूबिक मीटर था, जो 2011 में 1,545 क्यूबिक मीटर रह गया. 2025 में इसके घटकर 1,341 क्यूबिक मीटर और 2050 तक 1,140 क्यूबिक मीटर बचने की आशंका जताई गई है.

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