राम रहीम की लंका धूं-धूं करके जल गयी. देखते ही देखते जो बाबा ऐशोआराम की जिंदगी जी रहा था, वह 20 साल के लिए सलाखों के पीछे चला गया. उसके दबदबे का असर इतना था कि वह जिस पलड़े पर बैठ जाता था, उसकी सरकार बन जाती थी. आखिर किंग मेकर बाबा राम रहीम की सत्ता का अचानक उलटफेर कैसे हो गया. इन सारे सवालों का एक जवाब है हनीप्रीत की कसम.

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हनीप्रीत की कसम ने जला दी बाबा की लंका

हनीप्रीत की कसम


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दरअसल हनीप्रीत जब बाबा के डेरे में पहली बार आई थी, तो वह दूसरी दासियों की तरह थी. लेकिन कब ये दासी बाबा का वो तोता बन गयी, जिसमें राम रहीम की जान थी, इस बात का पता खुद बाबा को नहीं चला.

चश्मदीद आया सामने

बाबा की काली करतूतों के राज हनीप्रीत के पूर्व पति विश्वास गुप्ता ने तो खोले ही. लेकिन अब इस पूरे मामले का एक और चश्मदीद भी सामने आया है, जिसने बताया कि शादी के बाद जब पहली बार बाबा की गुफा में हनी गई, तो आखिर हुआ क्या था. राम रहीम के ड्राइवर रहे खट्टा सिंह के बेटे और हनीप्रीत और राम रहीम के रिश्तों के एक अहम चश्मदीद गुरदास सिंह हैं.

शादी के बाद की रात हनी को बुलाया

गुरदास का कहना है कि ये राम रहीम ही था, जिसने पहली बार हनीप्रीत पर बुरी नज़र डाली. पहले उसने हनीप्रीत की शादी करवाई और शादी के फौरन बाद रात को हनीप्रीत को अपनी गुफा में बुलाया.

गुरदास ने बताया कि उस रात वह अपने एक भाई के साथ गुफा के बाहर ड्यूटी पर था. उस दिन पहली बार शक हुआ कि हनीप्रीत के साथ राम रहीम कुछ गलत करने वाला है. इस बात को लेकर उसकी अपने भाई के साथ शर्त भी लगी. अगली सुबह जो कुछ हुआ, उसमें गुरदास की बात सही निकली.

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रोते हुए गुफा से बाहर आई  हनीप्रीत

बाबा की गुफ़ा से अगली सुबह हनीप्रीत रोती हुई निकली. खुद हनीप्रीत के दादा उन दिनों डेरे के खजांची थे. हनीप्रीत सीधे दादा के पास गई. तब उसके दादा ने हनीप्रीत की हालत देख कर डेरे में काफी हंगामा किया और राम रहीम के खिलाफ खुल कर बोले, लेकिन हथियारों के दम पर उन्हें चुप करा दिया गया.

हनीप्रीत ने खाई थी कसम

इस वाकये के बाद हनीप्रीत डेरा छोड़ कर अपने घर फतेहाबाद के लिए निकली, लेकिन बाबा के गुर्गों ने हनीप्रीत का पीछा किया और उसे रास्ते में ही एक ढाबे पर दबोच लिया और डेरे पर वापस ले आए. इसी दिन हनीप्रीत ने कसम खाई थी कि वो बाबा को बर्बाद करके ही दम लेगी.

अब गुरदास को भी लगता है कि राम रहीम की इस तबाही के पीछे शायद हनीप्रीत की कसम ही है. क्योंकि हनीप्रीत ने ही राम रहीम को फिल्मों का चस्का लगाया, फिर हनीप्रीत के कहने पर ही संत का चोला उतार कर राम रहीम डिज़ाइनर बाबा बना और इसके बाद हर वो काम करने लगा जो संत की गरिमा के ठीक उलट था.

बर्बादी का खुद गुनाहगार है राम रहीम

वैसे, राम रहीम की तबाही की वजह भले ही हनीप्रीत को बताया जा रहा हो, लेकिन इसके लिए ज़िम्मेदार खुद राम रहीम है. एक संत की गद्दी पर बैठने के बावजूद उसकी हरकतें खराब थीं.

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‘बाबा की माफ़ी’ की आड़ में रेप

बलात्कारी राम रहीम पहले से ही ब्लू फिल्मों का शौकीन था. डेरे में उसके लिए अलग से कैसेट मंगवाई जाती थीं. और तो और… जब एक साध्वी राम रहीम से खुल गई, तो उसने उसी के जरिए डेरे की लड़कियों का शोषण करने की शुरुआत की. माफी दिलाने के नाम पर स्कूल खोल कर लड़कियों के साथ रेप करने का उसका सिलसिला चलने लगा.

आख़िरकार एक दिन उसके इस पाप का भांडा फूटा और राम रहीम को साध्वियों से रेप का दोषी करार देते हुए अदालत ने उसे 20 साल की सजा सुनाई.

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