कहते हैं अनुभव बोलता है. बच्चों के झगड़ने पर अक्सर बड़े बीच बचाव करते हैं.कुछ इसी तरह का हाल इन दिनों संसद का है. लोकसभा स्पीकर सुमित्रा महाजन आजकल अपने अनुभव का बखूबी फायदा उठा रही हैं.

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सुमित्रा महाजन की क्लास

प्रश्नकाल के दौरान कई बार सदस्यों के बीच हुयी झडपों के दौरान वे मजेदार टिप्पणियां करके सभी को हंसने पर मजबूर कर देती हैं. इससे सदन का तनाव भरा माहौल हल्का हो जाता है.


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जैसे कि जब तेलंगाना, आन्ध्र प्रदेश और कर्नाटक  के सांसद जब आपस में कृष्णा नदी के पानी को लेकर अपनी बहस रोकने का नाम ही नहीं ले रहे थे, तो उन्होंने उन्हें शांत कराते हुए कहा,’अगर ऐसे ही लड़ते रहे तो सरस्वती की तरह दूसरी नदियाँ भी विलुप्त हो जायेंगी.’

इसी तरह ज्योतिरादित्य सिंधिया और पीयूष गोयल के बीच नोकझोंक जारी थी. उनके बीच जब कांग्रेस के वरिष्ठ नेता कांतिलाल भूरिया बहस में कूदने लगे तो स्पीकर ने मना किया. उन्होंने उन्हें युवाओं के बीच न पड़ने की सलाह दी.

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पानी बिजली को लेकर प्रश्नकाल के समय काफी बहस हुयी. ऊर्जा मंत्री पीयूष गोयल ने कहा कि मेरी बातों से ज्योतिरादित्य सिंधिया और कांग्रेस को चोट लग रही है. इस पर उन्होंने सलाह दी,’चोट ऐसी कीजिये जो लगे नहीं.

जब गोयल और सिंधिया ने एक दूसरे को पानी पिलाने की बात कही तो फिर से उन्होंने चुटकी लेते हुए कहा,’पानी पीजिये और पिलाइए, मगर शान्ति से पिलाइए.’

अपनी क्लास को हैंडल करने के लिए अगर किन्हीं मास्टर साहब को मंत्र सीखना हो तो उनसे सीख ले, क्योंकि उनकी क्लास से ज्यादा बिगड़ैल बच्चे पूरे देश के किसी भी स्कूल में नहीं होंगे. अब अगर वो उन्हें संभाल सकती है तो फिर कुछ देश नहीं बचता.

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वैसे हमने जब से ये बात अपने मास्टर चाचा को बताई है. तब से वो सारे काम भले भूल जाएँ, लेकिन संसद की कार्यवाही देखना कभी नहीं भूलते.

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