सुप्रीम कोर्ट ने शादी के बाद महिला के धर्म को लेकर बड़ा फैसला सुनाया है। कोर्ट ने कहा है कि शादी के बाद पत्नी का धर्म पति के अनुसार तय हो, ऐसा कोई कानून नहीं है। कोर्ट ने कहा कि दूसरे धर्म में शादी करने से ही पत्नी का धर्म नहीं बदल जाता है।

पारसी महिला ने की है हिंदू से शादी

सुप्रीम कोर्ट ने यह टिप्पणी एक पारसी महिला की हिंदू पुरुष से शादी के बाद धर्म परिवर्तन के मुद्दे पर की। मुख्य न्यायधीश दीपक मिश्रा, जस्टिस एके सीकरी, अशोक भूषण, डीवाई चंद्रचूड़ और एएम खानविलकर की पीठ ने यह टिप्पणी की।

अभिभावकों की अंत्येष्टि से रोका

कोर्ट ने कहा कि शादी के आधार पर किसी महिला को उसके मानवीय अधिकारों से वंचित नहीं किया जा सकता है। मामले के अनुसार, गुलरुख एम गुप्ता नामक पारसी मूल की महिला ने हिंदू से शादी की थी। वह अपने अभिभावक के अंतिम संस्कार में शामिल होना चाहती थीं, लेकिन वलसाड पारसी बोर्ड ने इसकी इजाजत नहीं दी।


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पारसी ट्रस्ट से जवाब मांगा

इस पर पीठ ने वलसाड पारसी ट्रस्ट से कहा कि 14 दिसंबर को बतायें कि हिंदू व्यक्ति से शादी करने वाली पारसी महिला को उसके माता-पिता के अंतिम संस्कार में शामिल होने की अनुमति मिल सकती है या नहीं।

हाईकोर्ट के फैसले को चुनौती

गुलरुख एम गुप्ता ने गुजरात हाईकोर्ट के एक फैसले को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी थी, जिसमें कहा गया था कि हिंदू पुरुष से शादी करने पर पारसी महिला अपने पारसी समुदाय की पहचान खो देती है। इसके बाद सुप्रीम कोर्ट ने टिप्पणी की।

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