दो साध्वियों से रेप मामले में सजा काट रहे राम रहीम की मुश्किलें बढ़ने वाली हैं. एक तो जब राम रहीम के वकील ने सीबीआई कोर्ट के निर्णय के खिलाफ हाइकोर्ट में याचिका दायर की तो वह टेक्निकल पेंच में फंस गयी. दूसरी ओर राम रहीम की मुश्किलें एक दूसरा आर्डर देकर खुद हाईकोर्ट ने बढ़ा दी.

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राम रहीम की मुश्किलें बढीं

राम रहीम की मुश्किलें


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दरअसल हरियाणा पंजाब हाईकोर्ट मोदी सरकार के दो ख़ास हथियार ईडी और आयकर विभागको राम रहीम की संपत्ति जांचने के आदेश दिए हैं. राम रहीम की प्रॉपर्टी की रिपोर्ट हरियाणा सरकार ने बुधवार को कोर्ट के सामने पेश की थी. जिसके बाद हाईकोर्ट ने राम रहीम की संपत्ति जांचने के लिए ईडी को आदेश दिए हैं. हाईकोर्ट ने इनकम टैक्स और ईडी को डेरे की आय और मनी लॉन्ड्रिंग की जांच के आदेश दिए हैं.

पंचकुला हिंसा की जांच

इसके अलावा पंचकुला हिंसा की जांच के लिए हाईकोर्ट का कहना है कि उसकी जांच एसआईटी से करवाई जानी चाहिए. हाइकोर्ट ने कहा है कि पंजाब और हरियाणा सरकार मुआवजा देने के लिए एक ट्रिब्यूनल का गठन करें. ये ट्रिब्यूनल ही तय करेगा कि नुकसान कितना हुआ है. ये ट्रिब्यूनल को ही तय करने दिया जाये कि नुकसान की भरपाई डेरा सच्चा सौदा से करनी है या नहीं.

इससे पहले निकले थे हरी भजन को ओटन लगे कपास… कहावत हुयी. राम रहीम को अपने लिए अब भी अच्छे दिनों की उम्मीद थी. इसीलिए उसने सीबीआई कोर्ट के निर्णय के खिलाफ हाईकोर्ट में अपील की थी. लेकिन पट्ठे को पहले ही पायदान पर मुंह की खानी पड़ी है. दरअसल राम रहीम के वकील ने जो याचिका हाईकोर्ट में दायर की थी, वह टेक्निकल पेंच में फंस गयी है.

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दरअसल राम रहीम के वकील एस के गर्ग नरवाना ने सीबीआई कोर्ट के फैसले के खिलाफ ये याचिका हाईकोर्ट में  दाखिल की थी. हाईकोर्ट की रजिस्ट्री ने इस याचिका पर आब्जेक्शन लगाते हुए इस याचिका को ठीक करके दोबारा याचिका दायर करने का निर्देश जारी किया है. वाकई बेचारे राम रहीम के तो बहुत ही बुरे दिन चल रहे हैं.

अपील अटकी

पहले दो साध्वियों से रेप का दोषी ठहराया गया. उसके बाद 20 साल की सजा तो हुयी ही साथ ही दोनों मामलों में 15-15 लाख का जुर्माना भी कोर्ट द्वारा लगाया गया है. इसी मामले राम रहीम रोहतक जेल में 20 साल की सजा काट रहा है. राम रहीं ने इसी सजा के खिलाफ हाईकोर्ट में अपील दायर की थी.

राम रहीम को जब सीबीआई कोर्ट ने दोषी ठहराते हुए सजा सुनाई थी तो उस समय जज जगदीप सिंह ने टिप्पणी की थी कि लड़कियां जिसे भगवान् मानकर पूजा करती थीं, उसने उन्हीं के साथ घिनौनी हरकत की. उस समय उन्होंने कहा था कि गुरमीत पर लगे आरोप गंभीर हैं और किसी भी हाल में वह दया का हक़दार नहीं है.

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रेयरेस्ट ऑफ़ रेयर केस

अदालत ने कहा था कि,’दोषी ने उन साध्वियों का यौन शोषण किया है जो उसे पिता की तरह मानती थीं और भगवान् की तरह पूजती थीं. पीड़ितों का विश्वास तोड़कर उसने उनका शारीरिक और मानसिक शोषण किया है. चूंकि पीड़िता उसी के संरक्षण में रहती थीं, इसलिए ये कस्टोडियल रेप से कम नहीं है. सीबीआई कोर्ट ने इसे रेयरेस्ट ऑफ़ रेयर केस माना था.

सीबीआई कोर्ट ने ये भी कहा था कि दोषी ने खुद को भगवान् के रूप में प्रस्तुत किया और अपनी ताकत का दुप्रुपयोग करते हुए उसने मासूम लड़कियों का रेप किया है.  इसका असर पूरे समाज पर होगा, इसीलिए ये रेयरेस्ट ऑफ़ रेयर केस है, जिसके लिए दोषी अधिकतम सजा का हकदार है.

हनीप्रीत की ओर से भी दिल्ली हाईकोर्ट में याचिका दायर की गयी थी, जिसमें मांग की गयी थी कि उसे सरेंडर करने के लिए तीन हफ्ते का वक़्त दिया जाए. इसके अलावा हनीप्रीत ने भी हर तरह के सहयोग के लिए भी कहा था, लेकिन दिल्ली हाईकोर्ट ने उसकी भी याचिका खारिज कर दी. अब बाप बेटी कहें या शौहर और बीवी दोनों की हालत जल बिन मछली जैसी हो गयी है.

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