राजधानी-शताब्दी एक्सप्रेस ट्रेनों का किराया वैसे तो रेलवे ने डायनमिक कर दिया है। ‘प्रभु’ की कृपा से डायनमिक व्यवस्था के चलते साधारण लोग इन लग्जरी ट्रेनों में यात्रा करने के बारे में सोच भी नहीं पाते थे। डायनमिक व्यवस्था में एक निश्चित सीमा तक सीटें बुक होने के बाद यात्रा की तारीख नजदीक आने पर किराया क्रमशः बढ़ता जाता है। इसका मतलब यह कि आपको कल यात्रा करनी है और आज टिकट ले रहे हैं, तो ज्यादा किराया चुकाना होगा। वहीं, दो महीने पहले टिकट लेते हैं तो मूल किराया ही पड़ेगा। अगर आप थोड़ी सजगता बरतें तो अब इन ट्रेनों में कम किराए वाली ट्रेनों के टिकट पर यात्रा कर सकेंगे। जी हां, रेलवे का नया नियम ‘विकल्प’ कुछ ऐसी ही सुविधा लेकर आया है। एक अप्रैल से इसे लागू किया जाएगा।

राजधानी-शताब्दी में भी लागू होगी नई व्यवस्था

राजधानी-शताब्दी समेत सभी ट्रेनों के लिए यह व्यवस्था लागू होगी। फिलहाल ऑनलाइन टिकट वाले यात्री ही इसका लुत्फ उठा पाएंगे। करना सिर्फ इतना है कि ऑनलाइन टिकट खरीदते समय विकल्प का विकल्प जरूर चुनें। बस, अब अगर आपको जहां जाना है, वहां की किसी और ट्रेन में सीट खाली रहती है तो  आपको मिल जाएगी। दूसरी ट्रेन में सीट कंफर्म होने की सूचना भी आपको मोबाइल से दे दी जाएगी। फिर उसी ट्रेन के चार्ट में आपका नाम होगा। इसके लिए आपको कोई अतिरिक्त किराया भी नहीं चुकाना होगा। तो है न आम के आम, गुठली के दाम।

इसलिए लिया फैसला

रेलवे हर साल टिकट निरस्त होने पर 7,500 करोड़ रुपए रिफंड देता है। इसमें बड़ी संख्या में वेटिंग वाले टिकट होते हैं। वहीं, कई ऐसी ट्रेनें होती हैं, जिनमें सीटें खाली रहती हैं। किराया ज्यादा होने पर लोग इन ट्रेनों में सफर नहीं करते। नई स्कीम से ऐसी ट्रेनों की बर्थ खाली नहीं रहेंगी और यात्री का सफर भी पूरा हो जाएगा। रेलवे को वेटिंग टिकट के रुपए नहीं लौटाने पड़ेंगे और लोगों को भीड़भाड़ वाले सीजन में लटक कर या फर्श पर लेट कर यात्रा भी नहीं करनी पड़ेगी।

टिकट अपग्रेड करने का प्रयोग

इसके पहले ट्रेनों की खाली सीटें भरने के लिए रेलवे एक प्रयोग कर चुका है। लालू प्रसाद जब रेल मंत्री थे तो ट्रेनों में टिकट अपग्रेड करने की सुविधा दी गई थी। इस व्यवस्था में किसी यात्री ने स्लीपर का टिकट लिया है और थर्ड एसी में सीट खाली रह जाती है तो वह सीट स्लीपर वाले यात्री को दे दी जाती थी। उक्त यात्री की खाली हुई स्लीपर की सीट वेटिंग वाले यात्री को मुहैया करा दी जाती थी।

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