यूं तो पीएम नरेन्द्र मोदी के सिपहसालारों की फ़ौज बड़ी लम्बी है. लेकिन जो बात अजीत डोभाल में है वो बात औरों में कहाँ. इसीलिए प्रधानमंत्री बनने के बाद एनएसए की ज़िम्मेदारी पीएम मोदी ने डोभाल के कन्धों पर सौंपी थी. उनसे खौफ खाने वालों में पहले तो पाकिस्तान का नाम ही शामिल था, लेकिन अब एक नाम चीन का भी शामिल हो गया है.

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एनएसए की ज़िम्मेदारी संभाली

एनएसए की ज़िम्मेदारी


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दरअसल भारत और चीन के बीच मौजूदा समय में डोकलाम विवाद जारी है. इसकी अहमियत को देखते हुए पीएम मोदी ने इसके निपटारे की पूरी ज़िम्मेदारी एनएसए अजीत डोभाल को सौंपी थी. डोभाल ने भी उन्हेंब निराश नहीं किया. जब से उन्होंने इस मामले में हाथ डाला, भारत को सफलता हासिल हुयी और भारत और चीन के बीच गतिरोध की दीवार पिघलती नज़र आने लगी है.

चीनी स्टेट काउंसलर से मुलाक़ात

इसके निपटारे के लिए हाल ही में डोभाल ने चीनी दौरा किया जो भारतीय लिहाज से ज़रूरी भी थी. चीन में डोभाल की मुलाक़ात चीन के स्टेट काउंसलर यांग जिएची से हुयी. यांग ने इस मुलाक़ात में डोभाल से पूछा कि क्या ये इलाका आपका है. चीनी काउंसलर को शायद इस सवाल के बदले जवाब की उम्मीद थी, लेकिन ऐसा नहीं हुआ.

एनएसए की ज़िम्मेदारी

दरअसल इस सवाल के जवाब में डोभाल ने चीनी काउंसलर से अपना तीखा और कूटनीति से भरा सवाल दाग दिया, कि क्या हर विवादित इलाका चीन का  हो जाता है. इसके बाद चीन को अपनी भूल का एहसास हुआ और काफी समय से दोनों देशों के बीच तनातनी की बर्फ पिघलती नज़र आने लगी.

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चीन को दिलाई याद

डोभाल ने चीनी राजनयिकों के साथ बातचीत में इस बात पर भी जोर दिया कि विवादित इलाका भूटान का  है और एक संधि के अनुसार भारत भूटान की रक्षा के लिए प्रतिबद्ध है. डोभाल ने चीन को ये बात भी याद दिलाई कि विवादित इलाके को लेकर चीन और भूटान के बीच कई दौर की बातचीत भी हुयी है.

चीन ने डोकलाम के बदले भूटान को अलग 500 वर्ग किलोमीटर ज़मीन देने का प्रस्ताव भी दिया है, लेकिन इस मामले पर अभी तक चीन और भूटान में सहमती नहीं बन पायी है. इसलिए दोनों देशों को विवादित इलाके से अपनी अपनी सेनायें एक साथ हटा लेनी चाहिए.

चीन की सहमति

चीन को ये बात  सही लगी और वह अपनी सेना हटाने पर सहमत हो गया. इस इलाके में सड़क निर्माण का कार्य भी  रोक देने पर  चीन सहमत हो गया है. हालांकि अभी तक चीन की ओर से इस  पर स्पष्ट रूप से स्थिति स्पष्ट नहीं की गयी है.

डोकलाम चीन, भारत और भूटान के त्रिमुहाने पर स्थिति जगह है. चीन इस इलाके में अपने भारी  वाहनों की आवाजाही के लिए सड़क निर्माण इस क्षेत्र में करना चाहता है, जिसे भारतीय सेना ने विरोध कर 16 जुलाई को रुकवा दिया था.

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