प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने मुंबई के तेह डॉकयार्ड पर गुरुवार को स्कार्पीन श्रेणी की पनडुब्बी आईएनएस कलवरी को राष्ट्र को समर्पित किया। इसके साथ ही भारतीय नौसेना की युद्ध क्षमता में एक नया अध्याय जुड़ गया। पिछले 17 सालों में नौसेना में शामिल होने वाली यह पहली पनडुब्बी है।

छह पनडुब्बियां होंगी नौसेना में शामिल

आईएनएस कलवरी एक डीजल-इलेक्ट्रिक युद्धक पनडुब्बी है, जिसे भारतीय नौसेना के लिए मझगांव डॉक शिपबिल्डर्स लिमिटेड ने बनाया है। यह स्कॉर्पीन श्रेणी की उन 6 पनडुब्बियों में से पहली पनडुब्बी है, जिसे 2020-21 तक भारतीय नौसेना में शामिल किया जाना है।


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फ्रांस के सहयोग से चलाई जा रही परियोजना

इस पनडुब्बी का निर्माण मेक इन इंडिया पहल की कामयाबी को दर्शाता है। इस परियोजना को फ्रांस के सहयोग से चलाया जा रहा है। फ्रांस की रक्षा एवं उर्जा कंपनी डीसीएनएस द्वारा डिजाइन की गईं पनडुब्बियां भारतीय नौसेना के प्रोजेक्ट-75 के तहत तैयार की जा रही हैं।

खतरनाक टाइगर शार्क के नाम पर रखा नाम

पनडुब्बी का नाम कलवरी हिंद महासागर में पाई जाने वाली खतरनाक टाइगर शार्क के नाम पर रखा गया है। नौसेना की परंपरा के मुताबिक शिप और सबमरीन के सेवामुक्त होने पर उन्हें दोबारा अवतरित किया जाता है। वैसा ही कलवरी के साथ भी हुआ।

1967 में शामिल की गई थी पहली कलवरी

पहली कलवरी 8 दिसंबर 1967 में भारतीय नौसेना में शामिल हुई थी और यह भारत की पहली पनडुब्बी भी थी। इसे 31 मार्च 1996 को 30 साल की राष्ट्रसेवा के बाद भारतीय नौसेना से रिटायर किया गया।

अत्याधुनिक तकनीक से युक्त है यह पनडुब्बी

कलवरी में स्टेट ऑफ आर्ट टेक्नोलॉजी का उपयोग किया गया है। यह एडवांस्ड साइलेंसिग टेक्निक से लैस है। शोर कम रखने के लिए इसमें रेडिएटेड टेक्नोलॉजी का उपयोग किया गया है। इसे हाइड्रो-डॉयनामिकली ऑप्टिमाइज्ड शेप दिया गया है।

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तारपीडो व ट्यूब विधि से एंटी-शिप मिसाइल का इस्तेमाल

यह तारपीडो और ट्यूब तरीके से एंटी-शिप मिसाइल का इस्तेमाल कर सकती है। कलवरी को इस तरह डिजाइन किया गया है कि यह कई तरह के अभियानों में हिस्सा ले सकती है। इनमें एंटी सरफेस वॉर, एंटी सबमरीन वॉर, इंटेलिजेंस इकट्ठा करना, माइंस बिछाना और एरिया सर्विलांस जैसे काम हैं।

पनडुब्बी बनाने वाले देशों में मजबूत हुआ भारत

इसके साथ ही भारत अब पनडुब्बी बनाने वाले देशों में अपनी जगह मजबूत कर चुका है। एमडीएल ने दूसरी स्कार्पीन खांदेरी बनाई थी और इसे जनवरी 2017 में लॉन्च किया गया था। खांदेरी का अभी समुद्र में ट्रायल चल रहा है।

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इसी साल के अंत में एक और स्कार्पीन होगी लांच

एक तीसरी स्कार्पीन करंज को इसी साल के आखिर में लांच किया जाएगा। हालांकि डिपार्टमेंट ऑफ डिफेंस प्रोडक्शन के प्रोत्साहन और सहयोग के बिना स्कार्पीन प्रोजेक्ट का इतनी सफलता हासिल कर पाना आसान नहीं था।

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