आप भी अगर खाने की थाली में अरहर की दाल के शौकीन हैं तो आपके लिए भी एक खुशखबरी है। दरअसल मोदी सरकार के सत्ता में आते ही सबसे पहले अगर कोई मुद्दा चर्चा में आया तो वो था दाल की बढ़ती कीमतें। बढ़ती कीमतें सरकार के लिए चुनौती बन गई थीं। ऐसे में सरकार को आम जनता के दिलों पर अगले लोकसभा चुनाव तक राज करना है तो कीमतों पर काबू पाना जरूरी है। सरकार ने दाल की कीमतों में कमी के लिए आयात से लेकर उत्‍पादन बढ़ाने जैसे कई तरीके आजमाए। इस साल लोग ही नहीं सरकार भी इस खबर से राहत की सांस ले सकती है कि दाल की कीमतों में बढ़ोतरी की गुंजाइश कम ही है। इसके पीछे एक खास वजह है जो बजट सत्र की शुरुआत के पहले दिन राष्‍ट्रपति रामनाथ कोविंद के अभि‍भाषण में सामने आई। इसके अलावा उन्‍होंने खेती-किसानी से जुड़ी कई बातों को अभिभाषण में रेखांकित किया।

योजनाओं पर की चर्चा
राष्ट्रपति ने अपने भाषण में किसानों की मुश्किलों की बात पर उनके जीवन स्तर को सुधारने के लिए सरकारी योजनाओं की चर्चा की। सरकारी योजनाओं के तहत खेती में होने वाले खर्चों को घटाने की बात भी कही। किसानों से जुडी़ हर समस्या का हल निकालना सरकार का मुख्य काम बताया।


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इन परियोजनाओं का भी है ख्‍याल
कुल 99 सिंचाईं परियोजनाएं सालों से लटकी हुईं हैं जिनको पूरा करने का काम प्रगति पर है। दालों के उत्पादन को लेकर सरकार ने कई नीतियां बनाईं जिनके चलते पिछले वर्ष के मुकाबले दाल उत्पादन में लगभग 38 फीसदी की बढो़तरी हुई है।

इतना हुआ है इजाफा
देश में लगभग 275 टन से अधिक फसलों की पैदावार की बात कही। फलों और सब्जियों की बात की जाए तो 300 मिलियन टन उत्पाद का इजाफा हुआ है। किसानों को फसल पैदावार के आधार पर फसलों का उचित दाम मिल सके, इसके लिए कृषि मंडियों को आनलाइन जोड़े जाने का काम तेजी से हो रहा है। eNAM पर 36 हजार करोड़ रुपए से ज्यादा का कृषि व्यापार किया जा चुका है। इससे 2022 तक किसानों की आय दोगुनी हो सकती है।

उत्‍पादन में हुई बढ़ोतरी
उर्वरकों के बंद पडे़ कारखानों को फिर से खोलने की बात कही। यूरिया के उत्पादन में भी बढो़तरी हुई है। ये सब सरकारी नीतियों के कारण ही संभव हो सका है। सरकार की नीतियों की वजह से यूरिया की कालाबाजारी पर भी रोक लगाई जा सकी है।

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