एक बार में तीन तलाक और तलाक-ए-बिद्दत को गैरकानूनी एवं अमान्य ठहराने का प्रावधान करने वाले प्रस्तावित कानून के मसौदे को केंद्र सरकार ने मंजूरी दे दी है। ऐसा तलाक देने वाले पति को नए प्रस्ताव में तीन साल जेल की सजा का प्रावधान है।

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केंद्रीय मंत्रिमंडल ने दी मंजूरी

केंद्रीय कानून मंत्री रविशंकर प्रसाद ने शुक्रवार को बताया कि मुस्लिम महिला विवाह अधिकार संरक्षण विधेयक पर केंद्रीय मंत्रिमंडल ने विचार किया और अपनी मंजूरी दी। यह विधेयक अगले हफ्ते संसद के शीतकालीन सत्र में पेश किया जा सकता है।


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अंतरमंत्रालयी समूह ने बनाया प्रस्ताव

गृहमंत्री राजनाथ सिंह की अध्यक्षता वाले अंतरमंत्रालयी समूह ने विधेयक का मसौदा तैयार किया था। इस समूह में वित्त मंत्री अरुण जेटली, विदेश मंत्री सुषमा स्वराज, कानून मंत्री रविशंकर प्रसाद और कानून राज्य मंत्री पीपी चौधरी शामिल थे।

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पीड़िता को मिलेंगे अधिकार

प्रस्तावित कानून सिर्फ एक बार में तीन तलाक के मामले में लागू होगा और इससे पीड़िता को अधिकार मिलेगा कि वह उचित गुजारा भत्ते की मांग करते हुए मजिस्ट्रेट से संपर्क कर सके।

यूपी में सबसे अधिक शिकायतें

सुप्रीम कोर्ट ने 22 अगस्त को एक बार में तीन तलाक को गैरकानूनी और असंवैधानिक करार दिया था। सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बाद सरकार का मानना था कि तीन तलाक का व्यवहार रुक जाएगा, लेकिन यह चलता रहा। उन्होंने कहा कि सरकार के पास सुप्रीम कोर्ट के फैसले से पूर्व कम से कम 177 शिकायतें आई थीं और फैसले के बाद 66 शिकायतें दर्ज हुई थीं। शिकायतें उत्तर प्रदेश में सबसे ज्यादा थीं।

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