अगर धोखेबाजी की पटकथा लिखी जाए तो चीन इस मामले में टॉप पर आएगा. 62 के युद्ध से लेकर 2017 के डोकलाम विवाद तक चाहें कुछ भी बदल गया हो, लेकिन अगर कुछ नहीं बदला तो वो चीन की धोखेबाजी. हाल ही में खबर आई कि चीन के साथ डोकलाम में भारत का गतिरोध ख़त्म हो रहा है क्योंकि दोनों देशों ने अपनी-अपनी सेनायें वहाँ से हटा ली हैं. लेकिन भारत का डोकलाम से हटाना भूल साबित हुयी है, क्योंकि चीन ने एक बार फिर दगेबाज़ी दिखाते हुए अपनी सेना वहाँ से नहीं हटाई है.

धोखेबाजी की पटकथा में चीन टॉप

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धोखेबाजी की पटकथा


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दरअसल ये पूरा मामला डोकलाम का है, जहां एक बार फिर चीन का धोखा सामने आया है. चीन का कहना है कि भारत ने डोकलाम को चीन का हिस्सा मान लिया है और इसी वजह से उसने अपनी सेना भी हटा दी है. ये दावा चीन के अखबार ग्लोबल टाइम्स में किया गया है. अखबार के मुताबिक, चीन ने भारत को दिखा दिया कि वह कितना कमजोर है.

आग उगलता चीन का अखबार

अखबार के संपाद‍कीय के मुताबिक, चीन ने कहा है कि भारत में पीएम नरेंद्र मोदी की सरकार लोगों के बीच अपनी छवि बेहतर बनाए रखना चाहती है. इसलिए मोदी सरकार ने डोकलाम से यह कहते हुए सेना हटा दी कि चीन भी पीछे हट गया है. लेकिन साफ कर दें कि डोकलाम में पीपुल्स लिबरेशन आर्मी गश्‍त लगाती रहेगी.

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इसके अलावा चीन ने भारतीय मीडिया के इस दावे को भी खारिज किया है कि नई दिल्ली ने बेहद गरिमापूर्ण तरीके से मामला सुलझाया है. अखबार में लिखा गया है कि दरअसल, बीजिंग चाहता था कि भारतीय सेना हारे हुए चेहरे के साथ वापस न लौटे, इसलिए उन्हें ऐसे ही जाने दिया गया. चीन के विदेश मंत्रालय ने भी कहा है कि अब भारत को सीख मिल गयी होगी. आगे से ऐसा न हो, इस बात का ध्यान रखना होगा.

डोकलाम विवाद

16 जून को यह विवाद उस समय सामने आया, जब चीनी सेना ने डोकलाम में सड़क बनाने की कोशिश की. इसके बाद दोनों देशों की सेनायें आमने-सामने आ गईं. हथियार पहुंचाए जाने लगे.

डोकलाम में किसी भी तरह की गतिविधि के लिए चीन, भारत और भूटान की इजाजत चाहिए होती है. लेकिन चीन ने इस नियम की अनदेखी की थी. दुनिया के सभी देश इस तथ्‍य से भलीभांति परिचित हैं. ऐसे में भारत अगले हफ्ते से चीन में होने वाले ब्रिक्स सम्मेलन का हिस्सा बनने से इनकार कर सकता था. ऐसा होता तो वैश्विक स्तर पर चीन की किरकिरी होती.

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इससे बचने के लिए ही चीन ने भारत के साथ डोकलाम से सेना हटाने का वादा किया. लेकिन अब वह अपने वादे से एक बार फिर मुकरता दिख रहा है. देखना दिलचस्प होगा कि चीन के इस दावे पर भारत ब्रिक्स में जवाब देता है या नहीं.

 

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