आजकल के बच्‍चे अपना कोर्स ही तैयार कर लें तो क्‍या कहने। मां-बाप तो उसी में खुश कि हमारा बच्‍चा बहुत पढ़ रहा है। समय और टीवी के कार्टून को देखते हुये तो यही लगता है कि बस हमारा बच्‍चा इग्‍जाम में पास होता चला जाए।

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फिलहाल तो मां-बाप का टेंशन सिर्फ इतना ही होता है लेकिन इस दौर के बच्‍चे कुछ अलग ही करने की चाह लेकर ही इस दुनिया में आते हैं। अभी हाल ही में एक छोटी सी बच्‍ची वो भी सिर्फ पांच साल की उसने गीता का कंठस्‍थ कर सभी को आश्‍चर्यचकित कर दिया।


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दरअसल हुआ यूं कि ओडिशा के तटीय जिले केंद्रपाड़ा की महज पांच साल की एक मुस्लिम बच्‍ची ने हिंदुओं के प्रमुख धार्मिक ग्रंथ भगवद् गीता के पठन में अपने से अधिक उम्र के बच्चों को पछाड़ कर पहली पोजिशन पायी है। यह कमाल करने वाली नन्‍हीं सी बच्‍ची का नाम फिरदौस है।

अल्पसंख्यक समुदाय की फिरदौस भगवद् गीता पठन प्रतियोगिता में जब पहले स्थान पर पहुंची तो सभी आश्चर्यचकित रह गए।

सौवनिया आवासीय विद्यालय में फर्स्‍ट क्‍लास की छात्र फिरदौस ने अपने से सीनियर छात्रों को पीछे छोड़ते हुए प्रतियोगिता में पहला स्थान पाया। जब उसकी क्‍लास के बच्‍चों को पढऩे में ही दिक्कत हो रही है तब वह इस छोटी सी उम्र में हिंदू धार्मिक ग्रंथ गीता (संस्कृत) को याद कर चुकी है। फिरदौस में असाधारण प्रतिभा है। उसने 6 से 14 साल की श्रेणी में गीता पाठन प्रतियोगिता में फर्स्ट प्राइज पाया।

केंद्रपाड़ा निवासी आर्यदत्ता मोहंती ने फिरदौस की उपलब्धि पर कहा, ‘हमने पढ़ा है कि इंडियन आइडल की गायिका के खिलाफ खुले मंच पर प्रस्तुति देने को लेकर फतवा जारी किया जा रहा है, लेकिन यहां एक मुस्लिम लडक़ी ने भगवद् गीता प्रतिस्पर्धा में शीर्ष स्थान पर पहुंचकर सांप्रदायिक सद्भाव एवं सहिष्णुता की मिसाल पेश की है।’

विलक्षण प्रतिभा की धनी फिरदौस कहती है, ‘मेरे शिक्षकों ने मुझे नैतिक शिक्षा का पाठ पढ़ाया है और मेरे अंदर ‘जियो और दूसरे को जीने दो’ की भावना पैदा की है।’

फिरदौस की मां कहती है, उसे फिरदौस की मां होने पर गर्व है। फिरदौस की मां आरिफा बीवी ने कहा कि मुझे उसकी मां होने पर गर्व है। यह जानकर मुझे बड़ी संतुष्टि हुई है कि मेरी बेटी हिंदू धार्मिक ग्रंथ के पठन में प्रथम स्थान पर आई।’ आरिफ बीवी पट्टमुंडई प्रखंड के दमरपुर गांव की निवासी हैं।

इससे पहले मुंबई में दो साल पहले 12 साल की मरियम सिद्दीकी ने भगवद् गीता पर आधारित ‘गीता चैंपियंस लीग’ जीती थी। इसे इस्कॉन इंटरनेशनल सोसाइटी ने आयोजित किया था। इस प्रतियोगिता में अधिकतर हिन्दू छात्र भी थे, लेकिन मरियम ने उन्हें हराकर स्पर्धा जीत ली थी।

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