डेरा सच्चा सौदा के गुरमीत को भक्त अपना भगवान मानते थे. दो साध्वियों से रेप के मामले में इस बाबा को 20 साल की सज़ा भी हुयी. लेकिन उसके गुनाहों की लिस्ट देखकर आप खुद सहमकर कहेंगे कि ये सजा कम है. सच सुनकर आप खुद सोचने पर मजबूर होंगे कि सजा के बाद जज के सामने रहम की भीख माँगने वाला बाबा का चेहरा सच है या फिर खूनी खेल की साजिश रचने वाला.

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खूनी खेल की साजिश का मास्टर माइंड

खूनी खेल की साजिश

दरअसल जिस दिन गुरमीत को दो साध्वियों से रेप का दोषी करार दिया गया था, उस दिन पंजाब और हरियाणा में हिंसक होते बाबा के भक्त तो लोगों को ज़रूर दिखाई दिए, लेकिन बाबा नहीं दिखे, जबकि इस पूरे नरसंहार  के पीछे कोई और नहीं बल्कि खुद बाबा थे. इस हिंसा में 38 लोग मारे गए थे और 150 से ज़्यादा घायल हुए थे.

भक्तों की तैयारी

दरअसल बाबा ने कोर्ट जाने से पहले ही अपना पूरा जाल बिछा दिया था और ‘कुर्बानी ब्रिगेड’ तैयार कर दी थी. इस कुर्बानी ब्रिगेड का काम था कि अगर कोर्ट बाबा को दोषी ठहराता है, तो हरियाणा-पंजाब को दंगे की आग में झोंक देना. इसके लिए पूरी तैयारी की गयी थी. इसका एक नमूना उन्होंने गुरमीत को कोर्ट द्वारा दोषी करार दिए जाते ही दिखा भी दिया था.

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जिस दिन गुरमीत को सजा सुनाई गयी, उस दिन हर कोई इसी खौफ में था कि ईश्वर जाने क्या होगा. हालांकि दंगाइयों के मंसूबों पर सुरक्षा व्यवस्था भारी पड़ी. जिस कुर्बानी ब्रिगेड को बाबा ने जेल जाने से पहले अपने लिए तैयार किया था, उसका कोड डिकोड हो गया था.

कुर्बानी ब्रिगेड के मंसूबे ख़ाक

दरअसल पुलिस के हाथ एक ऑडियो लगा, जिसमें इस कुर्बानी ब्रिगेड का पूरा राज मौजूद था. भक्तों को बाबा ने पहले ही हिंसा का सारा गुरु ज्ञान पिला दिया था. भक्तों को बाबा का नाम न लेने की नसीहत भी दी गयी थी. हालांकि इस ब्रिगेड के मंसूबों पर पानी ही नहीं फिरा बल्कि अंबाला पुलिस ने इस मामले में दो लोगों को गिरफ्तार भी किया है.

अंबाला पुलिस के एसपी अभिषेक के अनुसार गिरफ्तार किये गए लोगों के पास से 38 लाख रुपये बरामद किये हैं. इसके अलावा इन सभी को बातचीत के लिए जो कोड दिए गए थे, उनका भी पता लगा लिया गया. कुर्बानी ब्रिगेड की कोड वर्डिंग में ‘पानी सींचता’ का मतलब पेट्रोल डालकर आग लगाना, ‘पौधरोपण’ का मतलब आत्मदाह और ‘कली काटना’ यानी धारदार हथियार से काटना था.

पहले से थी बाबा की तैयारी

25 अगस्त को भड़की हिंसा में जिन 38 लोगों की मौत हुयी है, उनमें से 30 बाबा के भक्त हैं. अब इस ऑडियो के आधार पर शक ज़ाहिर किया जा रहा है कि बाक़ी बचे लोगों में जिन्होंने आत्मदाह किया है, उन्हें किसी ने जलाया है या उन्होंने खुद को आग लगा ली है. पुलिस के अनुसार 25 अगस्त से पहले राम रहीम के  भक्तों को खूब पैसे बांटे गए थे, ताकि इन पैसों का इस्तेमाल दंगे और तोड़-फोड़ और आगजनी में की जा सके.

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भरोसे के लोग थे शामिल

बताया जाता है कि इस ब्रिगेड में डेरे के बेहद भरोसेमंद लोगों को शामिल किया गया था. इनके घरवालों को ये भी विश्वास दिलाया गया था कि यदि उन्हें कुछ  हो जाता है तो उनकी ज़िम्मेदारी डेरा उठाएगा. गुरमीत के मास्टर माइंड का अगर समय रहते पर्दाफ़ाश न होता तो 25 अगस्त की कहानी फिर दोहराई जा सकती थी.

इसीलिए सुरक्षा के लिहाज से शासन प्रशासन को अपनी चाल बदलनी पड़ी. पंचकुला से अदालत को जेल में उड़कर आना पड़ा. अदालत की कार्रवाई जेल में ही संपन्न हुयी और गुरमीत को जेल से ही जेल भेजने की रस्म अदायगी की गयी.

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