आज भी कभी कभार पूजा-पाठ या भंडारे के वक्‍त भोजन परोसने के लिए पत्‍तों से बने दोने और पत्‍तल नजर आ जाते हैं। इसके अलावा अब अपने भारत में भला इनको कौन इस्‍तेमाल करना चाहता है। चमकती क्रॉकरी का जो ट्रेंड है। अब आपको एक ऐसी सच्‍चाई बताते हैं जिसे जानकर आप वाकई हिल जाएंगे। हमारे ही पत्‍तलों को हमने तो नजरअंदाज कर दिया, लेकिन जनाब जर्मनी वाले इन्‍हें ही कई फायदों के नाम पर बेचकर जमकर कमाई कर रहे हैं।

ये है वही पत्‍तल
जी हां ये वही पत्‍तल हैं, जो पेड़ के पत्तों से बनता था, लेकिन जनाब अब तो हम मॉडर्न हो गए हैं। पत्तल को कूड़ा समझकर फेंक दिया है। वहीं ये जर्मनी वाले तो कुछ ज्यादा ही होशियार निकले, जो हमारे देसी पत्तलों को बनाकर देश विदेश में बेच रहे हैं और खूब कमाई कर रहे हैं।

हम लोगों ने तो फेंक दिया
हम लोगों ने पत्तल को कूड़े वाली प्लेट बताकर हटा दिया और ले आए प्लास्टिक, थर्माकोल वाली स्टाइलिश प्‍लेट और चमकती क्रॉकरी। प्‍लास्‍टिक और थर्माकोल की प्‍लेटों को कहीं भी फेंकिए, गलने में उन्‍हें सैकड़ों साल लगते हैं। वहीं पत्‍तल पूरी तरह से प्राकृतिक थे और आसानी से गल जाने वाले थे।


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कर रहे हैं जमकर प्रोडक्‍शन
अब यही हमारी पुरानी देसी प्लेट को जर्मनी में कुछ लोग नेचुरल लीफ प्लेट बताकर धुआंधार प्रोडक्शन कर रहे हैं और देश ही नहीं बाहर भी एक्सपोर्ट कर रहे हैं। हाल ही में जर्मनी में एक नया बिजनेस स्टार्टअप शुरू हुआ है जिसका नाम है लीफ रिपब्लिक। एनवायरमेंट फ्रेंडली इस देसी प्रोडक्ट को देखा तो जर्मनी वाले इसे देखकर हक्‍के-बक्‍के रह गए।

ये कहना है जर्मनी वालों को
यही नहीं जर्मनी वालों का तो ये तक कहना है कि यह शानदार प्लेट है प्लास्टिक से मजबूत भी है। इसके इतर आराम से मिट्टी में मिल जाती है और बिना पेड़ काटे भी बन जाती है। लीफ रिपब्लिक वालों ने तो बकायदा फैक्ट्री डालकर आधुनिक मशीनों से पत्तलों का धुआंधार प्रोडक्शन करना शुरू कर दिया है।

ऐसे करते हैं प्रोडक्‍शन
पहले तो ये लोग देश में ही पत्‍तलें बेच रहे थे और अब तो विदेशी लोग भी जर्मनी की इस देशी टेक्नोलॉजी को पसंद करने लगे हैं। इस वीडियों में देखिए कि जर्मनी वाले हमारे देशी पत्‍तल का नया अवतार कैसे लॉन्‍च किया है।

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