आसमान में दो सूरज दिखें तो कैसा लगेगा। चमत्कार? वैसे तो सूरज एक तारा है। ब्रह्माण्ड में ऐसे तमाम तारे हैं। सूरज धरती के सबसे नजदीक है, तो सूरज है। अब ऐसे ही एक और दिखने लगे तो चमत्कार ही होगा न। जर्मनी के वैज्ञानिकों ने इसे कर दिखाया है। अच्छी बात सिर्फ इतनी है कि यह सूरज धरती को तपाएगा नहीं। वरना एक ही सूरज की गर्मी नहीं झेली जाती, दूसरी की कैसे झेलते।

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आसमान में दो सूरज बनाने में लगे थे वैज्ञानिक

वास्तव में दुनियाभर में ऊर्जा की किल्लत दूर करने के लिए वैज्ञानिक लंबे समय से कृत्रिम सूरज तैयार करने में लगे थे। अब जर्मनी के वैज्ञानिकों को इसमें सफलता भी मिल गई है। इसमें पूरे दो साल का वक्त लग गया। जैसे चीन ने कृत्रिम बारिश कराने में सफलता पाई थी, वैसा ही कारनामा जर्मनी ने कर दिखाया है। जर्मन स्पेस सेंटर को यह सफलता मिली है।


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पृथ्वी की ऊर्जा जरूरतों को पूरा करने की कोशिश

सूरज की प्रक्रियाओं की तरह नाभिकीय संलयन पर काफी समय से वैज्ञानिक शोध कर रहे थे। इसका उद्देश्य था कि ऐसी प्रक्रिया से पृथ्वी वासियों को ऊर्जा मुहैया कराई जा सकी। कार्बन के बिना बिजली बनाने के परीक्षण की शुरुआत तो काफी पहले हो ही चुकी थी। जर्मनी के सेंटर में हीलियम से पहला प्लाज्मा भी बनाया जा चुका था।

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जर्मनी के रिएक्टर में मिली सफलता

जर्मनी का वेंडेलश्टाइन 7एक्स टेस्ट प्लांट विश्व के सबसे बड़े फ्यूजन टेस्ट प्लांट में शामिल है। इस प्लांट में प्लाज्मा बनाने के लिए डायटेरियम का प्रयोग भी शुरू हो गया है। हाइड्रोजन के इस आइसोटोप के इस्तेमाल से बिजली बनाने के दौरान बहुत कम रेडियोएक्टीविटी पैदा होती है।

10 करोड़ डिग्री पर विस्फोट

वेंडेलश्टाइन 7एक्स टेस्ट प्लांट (रिएक्टर) जर्मनी के ग्राइफ्सवाल्ड शहर में है। इसमें 10 करोड़ डिग्री सेल्सियम के तापमान पर परमाणु विस्फोट किया गया। इसके लिए प्लाज्मा पहले से ही तैयार था। विस्फोट के साथ ही सूरज जैसी प्रकृति के साथ उर्जा का उत्पादन शुरू हो गया। तो है न यह दुनिया का दूसरा सूरज।

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