किसी भी सरकार की सफलता की इबारत उसके द्वारा किया गया विकास बताता है. पहले जहाँ सड़क और पुल सरकार का विकास दिखाने के मानक थे. वहीँ, अब सरकारों ने नया ट्रेंड अपना लिया है. अब सरकार की कलर थैरेपी विकास का मानक हो गई है. उत्तर प्रदेश में भाजपा की सरकार बने 6 महीने से ज़्यादा समय हो चुका है. ऐसे में विकास की बात चाहें दिखी हो या न दिखी हो, लेकिन कई महत्वपूर्ण विभाग ऐसे हैं, जिनके बारे में पता चलता है कि उनका कलर बदला जा चुका है. वैसे हो भी क्यों न, आखिर ये किसी भी सरकार का मौलिक अधिकार जो ठहरा.

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सरकार की कलर थैरेपी


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फिलहाल इन दिनों चर्चा एनेक्सी भवन के कलर बदलने को लेकर हो रही है. अब तक इसका कलर सफ़ेद था. लेकिन इस भवन के बनने के बाद से ये पहला मौक़ा है, जब इसका कलर बदला जा रहा है. सीएम योगी आदित्यनाथ का ये कार्यालय अब सफ़ेद नहीं, बल्कि भगवा कलर का नज़र आयेगा.

हालांकि सरकार द्वारा इस कलर थैरेपी का इस्तेमाल उत्तर प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री अखिलेश यादव को अच्छा नहीं लगा. इसीलिए उन्होंने इस पर टिप्पणी करते हुए कहा भी है, ‘केवल रंग चढ़ाने से नहीं चढ़ता विकास का रंग. विकास होने से ही बदलता है राज्य का रंग.’ हालांकि पूर्व सीएम का ये दर्द इसलिए भी लाजिमी है, क्योंकि भगवा कलर को आरएसएस और भाजपा का प्रतीक माना जाता है. ऐसे में ये कलर उन्हें कैसे पसंद आता.

खैर, पूर्व सीएम साहब भी जब सूबे के मुखिया थे, तो बसों से लेकर न जाने क्या-क्या हरा और लाल कर दिया था. मानो जो कुछ भी दिखाई दे सबका कलर लाल-हरा ही होना चाहिए. यहाँ तक कि मरीजों की एम्बुलेंस का कलर भी लाल और हरा हुआ.

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अगर उनसे और पहले की बात करें, तो पूर्व मुख्यमंत्री मायावती के समय यही कलर नीला हो जाता था. क्योंकि नीले रंग को परम्परागत बसपा का कलर माना जाता है. बहन जी के सामने हर चीज़ बहुधा नीली ही रखी जाती थी. दबे मुंह अधिकारियों के बीच चर्चा इस बात की भी रहती थी कि अगर कोई दूसरा कलर इस्तेमाल किया तो नौकरी गई समझो. बेचारे… मरता क्या न करता की तर्ज पर काम को अंजाम देने में जुटे हुए थे.

हालांकि जब से सीएम योगी आदित्यनाथ सूबे के मुखिया बने हैं, तब से इस तरह के आरोप उन पर भी लगे हैं. उनके बारे में ये तक कहा गया कि जिस चेयर पर वे बैठते हैं, उस पर केसरिया तौलिया डाला जाता है. उन्हें पीएम मोदी के व्यक्तित्व से उदाहरण लेने की सलाह भी दी गई थी. खैर, अगर विकास का पर्चा बड़ा हो जाए, तो शायद कलर थैरेपी की चर्चा लोग करना बंद कर दें. लेकिन जब जनता को उसके मुताबिक़ काम नहीं दिखाई देता तो उसका पूरा ध्यान ये कलर थैरेपी की आकृष्ट कर लेती है.

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अखिलेश यादव ने लिखा

अखिलेश यादव ने भाजपा की कलर थैरेपी पर ट्वीट किया है. अखिलेश ने अपने ट्वीट के साथ मेट्रो को लेकर केन्द्रीय भूतल परिवहन मंत्री नितिन गडकरी से मिले इनाम और एनेक्सी में पुताई का फोटो भी टैग किया है. उनका कहना था कि,’भाजपा सरकार को समझना चाहिए कि रंग बदलने से विकास नहीं होता है. विकास होने से ही राज्य का रंग बदलता है और तब प्रदेशवासियों का मन भी बदलता है.’

 

इसके अलावा उन्होंने लिखा, ‘सपा सरकार ने मेट्रो रेल, आगरा-लखनऊ एक्सप्रेस-वे, जनेश्वर मिश्र पार्क और गोमती रिवरफ्रंट के जरिए राज्य की जनता को विकास के नए रंगों से परिचय कराया था. ये रंग जनता के मन में बस गए हैं. भाजपा ने अपने गलत कामों से उत्तर प्रदेश को बदरंग कर दिया है. ऐसी भाजपा को जनता अब अपना रंग 2019 के चुनावों में दिखाएगी.’

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खैर, रोडवेज बसों का रंग उन्होंने बदलवाया था. अब सचिवालय एनेक्सी का रंग भाजपा बदलवाए दे रही है. जनता को भी नई-नई कलर थैरेपी से रूबरू होने का मौक़ा मिल रहा है. लेकिन इसके साथ अगर थोड़ा बहुत विकास भी मिल जाए, तो जनता इस कलर थैरेपी से ध्यान हटाकर विकास में मग्न हो जायेगी. फिर तो नेताजी भी खुश और जनता गाएगी,’मौजा ही मौजा…’

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