रवीश कुमार ने पीएम मोदी को पत्र लिखा है जिसमें उन्होंने पीएम से तीखे सवाल पूछे हैं. उन्होंने ये पत्र फेसबुक पर नरेन्द्र मोदी को संबोधित करते हुए लिखा है. अपने लिखे  गए इस पत्र में रवीश कुमार ने पीएम मोदी द्वारा ट्विटर पर फ़ॉलो किये जाने वालों को लेकर सवाल उठाये हैं.

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मोदी को पत्र में रवीश के तीखे सवाल

मोदी को पत्र


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ट्विटर पर फ़ॉलो करने पर सवाल

पीएम मोदी किसे फॉलो करते हैं और क्यों इस बात का स्पष्टीकरण रवीश कुमार चाहते हैं. उन्होंने लिखा है कि ‘सोशल मीडिया के मंचों पर भाषाई शालीनता कुचली जा रही है. इसमें आपके (पीएम मोदी) नेतृत्व में चलने वाले संगठन के सदस्यों, समर्थकों के अलावा विरोधियों के संगठन और सदस्य भी शामिल हैं. दुख की बात है कि अभद्र भाषा और धमकी देने वाले कुछ लोगों को आप ट्वीटर पर फोलो करते हैं.’

रवीश कुमार आगे लिखते हैं कि ‘सार्वजनिक रूप से उजागर होने, विवाद होने के बाद भी फ़ॉलो करते हैं. भारत के प्रधानमंत्री की सोहबत में ऐसे लोग हों, यह न तो आपको शोभा देता है और न ही आपके पद की गरिमा को. किन्हीं ख़ास योग्यताओं के कारण ही आप किसी को फ़ॉलो करते होंगे. मुझे पूरी उम्मीद है कि धमकाने, गाली देने और घोर सांप्रदायिक बातें करने को आप फोलो करने की योग्यता नहीं मानते होंगे.’

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मैंने पेज पर किया उजागर, फिर फ़ॉलो करते हैं क्यों

पत्र में रवीश ने आगे लिखा, ‘अब मेरा आपसे एक सवाल है. क्या आप वाक़ई नीरज दवे और निखिल दधीच को फोलो करते हैं? क्यों करते हैं? कुछ दिन पहले मैंने इनके व्हाट्स अप ग्रुप का कुछ स्क्रीन शाट अपने फेसबुक पेज @RavishKaPage पर ज़ाहिर कर दिया था. मैं एक सामान्य नागरिक हूं और अदना सा परंतु सजग पत्रकार हूं. जिसके बारे में आज कल हर दूसरा कहकर निकल जाता है कि जल्दी ही आपकी कृपा से सड़क पर आने वाला हूं. सोशल मीडिया पर पिछले दिनों इसका उत्सव भी मनाया गया कि अब मेरी नौकरी जाएगी. कइयों ने कहा और कहते हैं कि सरकार मेरे पीछे पड़ी है.’

मोदी पर लगाया आरोप

रवीश कुमार ने ये भी आरोप लगाया है कि ‘हाल ही में हिन्दुस्तान टाइम्स के संपादक बॉबी घोष को आपकी नापसंदगी के कारण चलता कर दिया गया. इसकी ख़बर मैंने thewire.in में पढ़ी. कहते हैं कि अब मेरी बारी है. यह सब सुनकर हंसी तो आती है पर चिन्तित होता हूं. मुझे यकीन करने का जी नहीं करता कि भारत का एक सशक्त प्रधानमंत्री एक पत्रकार की नौकरी ले सकता है. तब लोग कहते हैं कि थोड़े दिनों की बात है, देख लेना, तुम्हारा इंतज़ाम हो गया है. ऐसा है क्या सर?’

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सवाल ये उठता है कि रवीश कुमार ने जो प्रश्न उठाये हैं वे कितने जायज हैं. प्रधानमंत्री देश के हैं ये तो मामला ठीक है. लेकिन वे किसे फ़ॉलो करते हैं और किसे नहीं ये सवाल व्यक्तिगत है. एक तरफ अभिव्यक्ति की आज़ादी की बात की जाती है. इसके अलावा निजता के अधिकार की भी मांग की जाती है.

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दूसरी तरफ यही मांग करने वाले लोग जब मौक़ा आता है तो दूसरे पलड़े पर बैठकर प्रश्न करते दिखाई देते  हैं. पीएम मोदी से इस तरह के पर्सनल सवाल करना क्या अभिव्यक्ति की आज़ादी और निजता  के अधिकार का उल्लंघन के दायरे में नहीं आते, इस बात का जवाब रवीश कुमार बेहतर तरीके से जानते होंगे.

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