नोटबंदी का एक साल पूरा होने पर एक बार फिर यह मुद्दा चर्चा में है. इसका मज़ेदार आकलन कवियों से बेहतर कौन कर सकता है. इसीलिए लखनऊ के शीरोज़ हैंग आउट में इस मुद्दे पर हास्य व्यंग्य कविताएं पढ़ी गईं. काला धन और भ्रष्टाचार पर भी रचनाएँ सुनाई गईं. कार्यक्रम की परिकल्पना मुकल महान और निर्देशन पंकज प्रसून का था.

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नोटबंदी का एक साल आरम्भ में कवि पंकज प्रसून ने लघुकथा सुनाते हुए कहा, ”एक राजा था, जिसके राज्य में चोरियां खूब होती थीं. राजा चोरियां नहीं रोक पा रहा था. उसने संकल्प लिया की चोरों को सजा जरूर दूंगा, जिसके तहत उसने सारे नगरवासियों को सौ सौ कोड़े मारने का हुक्म सुना दिया. मंत्री ने पूछा की ऐसा क्यों, तो राजा बोला, ‘इससे चोरों को भी कोड़े पड़ जाएंगे.’


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सुनिए इस मौके पर कवियों के व्यंग्य

मुकल महान

पांच सौ का नोट बोला

हमें अपनी शहादत पर गर्व है

क्योंकि हमारी शहादत

देश के सुनहरे भविष्य का महापर्व है

 

सूर्य कुमार पांडे

राजा तेरे राज में कैसा हुआ कलेस

नोट ग़ुलाबी हो गए, पीले हो गए फेस

ओ मेरी सरकार

तुमने क्या किया

कह रहे हो

स्वच्छ सागर कर लिया

मगरमच्छों को दिया जलकुंड और मछलियों को रेत पर तड़पा दिया

नोटबंदी का एक साल

वाहिद अली वाहिद

सब जाने पहचाने होंगे

जिनके नोट पुराने होंगे

नये गुलाबी नोट के मालिक

सारे चोर सयाने होंगे

नोट जमा जनधन खाते में

जिम्मेदार फलाने होंगे

 

सर्वेश अस्थाना

लग के दादा लाइन मा नोट लिहिन बदलाय

घरमा घुसतै खन सुनो दादी लिहिन छिनाय

 

अशोक झँझटी

सर उठाकर शहर आया था कमाने के लिए

गांव लौटा

सेठ के आगे झुका सिर  रख दिया

नोट बंदी की जहां पर हो रही तारीफ थी

घर के मुखिया ने वहीं खाली कनस्तर रख दिया

 

पंकज प्रसून

नये कमरों में अब नोटें पुरानी कौन रखता है

बुढ़ापे में बचा अपनी जवानी कौन रखता है

हमीं गिरते हुए रुपए को थामे अब तलक वरना

सलीके से गवर्नर की निशानी कौन रखता है।

 

अब करेंसी कोई ऐसी भी चलाई जाए

जिसमें चिप हो मगर रोटी भी लगाई जाए

बन्द नोटों को करो लेकिन ये गुंजाइश रहे

गर पुरानी नोट मिल जाए तो शर्मिन्दा न हों

 

खड़े हुए लाइन में सब

स्टैंडअप इण्डिया सफर रहा है

देश मेरा बदले न बदले नोट हमारा बदल रहा है

 

क्षितिज श्रीवास्तव

बागीचा नोच डाला खार के चक्कर में

मारे गए शरीफ गुनहगार के चक्कर में

 

अलंकार रस्तोगी

अपनी गुल्लकों के चिल्लर हमारे साथ रहने दो

न जाने किस घड़ी ये नोट बेमानी हो जाएं

 

सौरभ श्रीवास्तव

हो प्रहार गद्दारों पर हो गद्दारों के आसन पर

भारत माँ की जय गुँजित हो देश चले अनुशासन पर

टेढ़ी चालें चलते हैं जो उनकी टाँगे सीधी हों

काम यही दे कर भेजा है मोदी को सिंहासन पर

 

राजेश श्रीवास्तव

काला धन तो हो गया

देखो कितना लाल

काले धन वाले हुए

जब सारे कंगाल

 

बंदी आई नोट की

जब से पिछले साल

चोरों की गलती नहीं

तब से अब तक दाल

 

डा निर्मल दर्शन

बापू एक कमावे वाला सारा देश है खउवा रे

हड़ा हड़ा कौवा रे.. (समापन)

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