अभी छह महीने ही हुए हैं, जब केंद्र में नरेंद्र मोदी की अगुवाई वाली सरकार के प्रमुख आर्थिक सलाहकार अरविंद सुब्रमण्यन ने कहा था कि ग्लोबल क्रेडिट रेटिंग्स एजेंसी मूडीज भारत में हो रहे आर्थिक सुधारों की अनदेखी कर रही है।

काम आ गई सुब्रमण्यन की फटकार

अब जब एजेंसी ने भारत की रेटिंग में सुधार कर लिया है तो लगता है कि उनकी फटकार काम आ गई। मूडीज इनवेस्टर सर्विस ने शुक्रवार को भारत की सॉवरेन रेटिंग को बीएए-3 से बढ़ाकर बीएए-2 कर दी।

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मोदी सरकार के आर्थिक सुधारों पर मुहर

इसके बाद अरविंद सुब्रमण्यन ने कहा कि मूडीज की ओर से रेटिंग में सुधार का लंबे समय से इंतजार था। इस फैसले से मोदी सरकार के बड़े आर्थिक सुधार जैसे जीएसटी, बैंक रीकैपिटलाइजेशन प्लान, बैंकरप्सी कोड और मैक्रो स्टैबिलिटी पर मुहर लगी है।

यह कहा था अरविंद सुब्रमण्यन ने मई में

इसके पहले मई में सुब्रमण्यन ने कहा था कि मूडीज ने भारत की सुधरती आर्थिक स्थिति को नजरअंदाज करते हुए क्रेडिट रेटिंग को कायम रखा है। यह भी कहा था कि पश्चिमी देशों की ये रेटिंग एजेंसियां भारत और चीन की अर्थव्यवस्था का सही आकलन नहीं करती हैं।

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महंगा कर्ज लेने की मजबूरी का दिया था हवाला

छह महीने पहले के बयान के मुताबिक सुब्रमण्यन ने दलील दी थी कि मूडीज ने भारत को न्यूनतम ग्रेड दिया है, जिससे विश्व बाजार में महंगा कर्ज लेना उसकी मजबूरी बनी रहे, क्योंकि न्यूनतम ग्रेड का साफ मतलब होता है कि उक्त देश में निवेश करना खतरनाक है।

भारतीय अर्थव्यवस्था के लिए अच्छा फैसला

इससे पहले मूडीज ने भारत की रेटिंग में इजाफा 2004 में किया था। 2015 में मोदी सरकार बनने के एक साल बाद उसने भारतीय अर्थव्यवस्था के आउटलुक को स्थिर से सकारात्मक कर दिया था। रेटिंग में सुधार भारतीय अर्थव्यवस्था के लिए अच्छा साबित होगा।

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