आज के दौर में पेन ड्राइव जेब में रहना जरूरी है। डिजिटल वक्त है। न जाने कब-क्या सेव करने की जरूरत बन पड़े। लेकिन पेन ड्राइव लेते समय आप किन बातों का ध्‍यान रखते हैं। क्या सिर्फ ये ध्‍यान देते हैं कि पेनड्राइव कितने जीबी है। अजी ठहरिए, पेन ड्राइव ले रहे हैं या गेहूं-चावल की बोरी, जो बस ध्‍यान देखकर खुश हो जाएं।

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पेन ड्राइव


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आपने देखा होगा 16 जीबी की एक पेनड्राइव हजार रुपए में मिलती है, तो दूसरी महज 500 में। कभी सोचते हैं कि आखिर माजरा क्या है। दरअसल, पेन ड्राइव के दो वर्जन होते हैं। इन्हें 3.0 और 2.0 कहा जाता है। 3.0 नया वर्जन है और यह 100 एमबी प्रति सेकेंड की स्पीड से डाटा ट्रांसफर में मदद करता है। 2.0 वर्जन की स्पीड 10 से 15 एमबी प्रति सेकेंड होती है। साफ है कि मामला स्पीड का है।

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जनाब, पेन ड्राइव लेते वक्त ध्‍यान रखिए कि दुकानदार साहब कहीं वो वाला पैक न दे दे, जो पैक रहकर भी खुल जाता है। असल में कई कंपनियां ऐसे पैक में पेनड्राइव देती हैं, जिन्हें खोलकर पेनड्राइव देखी और इस्तेमाल की जा सकती है। इसके बाद उन्हें वापस पैक में ऐसे सहेजा जा सकता है, मानो कभी इन्हें निकाला ही नहीं गया हो।

कंपनियां पेन ड्राइव पर वारंटी भी देती हैं। कोई तीन साल, कोई पांच तो कोई सात साल। पेन ड्राइव खरीदते वक्त इस बात का भी ध्‍यान रखें कि आखिर आपकी पेन ड्राइवर पर कितने साल की वारंटी मिल रही है, ताकि उस दौरान दिक्कत आने पर आप ये डिवाइस सही या वापस करवा सकें।

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अगर आप रोजमर्रा के यूज के लिए पेन ड्राइव लेना चाहते हैं, तो उसकी स्पीड जरूर देखें। रोजमर्रा के यूज के दौरान आप अन्य फैक्टर्स  के साथ एडजस्ट कर सकते हैं। लेकिन अगर आपको हाई स्पीड डाटा ट्रांसफर करना होता है और या फिर आपको अपना डाटा पासवर्ड प्रोटेक्टेड रखना है, तो आप उस हिसाब से अपनी पेन ड्राइव का चुनाव कर सकते हैं।

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