भारत के लिहाज से नवंबर का महीना बेहद अहम है. अब तक इस महीने को सबसे ज़्यादा बच्चों के प्रिय चाचा एवं स्वतंत्र भारत के पहले प्रधानमंत्री जवाहर लाल नेहरू के जन्मदिन को बाल दिवस के रूप में जाना जाता था. लेकिन अब इसके अलावा ये महीना एक और वजह से भी ज़्यादा पॉपुलर है, क्योंकि इसी महीने की 8 तारीख की शाम को नोटबंदी का ऐलान किया गया था. अब जैसे-जैसे ये तारीख नज़दीक आ रही है, इस पर सियासत तेज होती जा रही है.

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8 नवंबर को हुआ था नोटबंदी का ऐलान

नोटबंदी का ऐलान


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सरकार ने जहां इस मुद्दे को सफल बताते हुए अपनी पीठ थपथपाई है वहीँ कांग्रेस समेत सभी विपक्षी पार्टियों ने नोटबंदी को एमएमडी यानी मोदी मेड डिजास्टर करार दिया है. जबकि भाजपा ने इसकी सफलता के तौर पर नोटबंदी के फैसले के बाद उत्तर प्रदेश और उत्तराखंड में हुए चुनाव में पार्टी को मिली भारी जीत को मिसाल के तौर पर पेश किया है.

भाजपा ने बताई थी सफलता

इस नोटबंदी के साथ ही देश भारत के नोटों ने भी तरक्की की थी और 2000 रुपये का नया नोट भी भारतीय मुद्राओं में शामिल हुआ था. हालांकि इस नोट को लेकर ऐसे कयास लगाए जाते रहे हैं कि 2000 रुपये का नोट लंबे समय तक प्रचलन में नहीं रहेगा. इसे जल्द ही सरकार बंद कर देगी.

इस बात को बल इस बात से भी मिला था जब 2000 रुपये के नोट को शुरू किए जाने के एक महीने बाद ही, दिसंबर 2016 में आरएसएस विचारक एस गुरुमूर्ति ने कहा था कि,’जो लोग 2000 रुपये के नोटों की जमाखोरी करना चाहते हैं, वो पहले दो बार सोच लें, क्योंकि ये नोट ज्यादा दिनों तक प्रचलन में नहीं रहेगा.

रिपोर्ट का दावा

इसके बाद जुलाई, 2017 में ‘इकनॉमिक टाइम्स’ में प्रकाशित एक रिपोर्ट में इस बात का दावा किया गया था कि रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया की ओर से 2000 रुपये के नोटों की आपूर्ति नहीं किए जाने से इस तरह की अटकलों को बल मिला है. लेख में दावा था कि, सोची समझी रणनीति के तहत 2000 रुपये के नोटों की आपूर्ति सीमित की जा रही है. इसके अलावा एक जगह उसी वक्त एक रिपोर्ट में कहा गया था कि आरबीआई ने 2000 रुपए के नोट छापने बंद कर दिए हैं.  मौजूदा वित्त वर्ष में इन्हें अब और नहीं छापा जाएगा.

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जब से 2000 रुपये का नोट आया है तब से इसे लेकर बयानबहादुरों के बयान सामने आते रहते हैं. इसी साल अप्रैल में सरकार ने राज्य सभा में स्पष्ट किया था कि 2000 रुपये के नोटों के विमुद्रीकरण की फिलहाल कोई योजना नहीं है. अगस्त में वित्त मंत्री से जब सवाल किया गया कि क्या सरकार 2000 रुपये के नोटों को चरणबद्ध ढंग से प्रचलन से बाहर करने पर विचार कर रही है, तो उनका कहना था कि, ‘नहीं, फिलहाल ऐसा कोई विचार नहीं चल रहा है.’

आरटीआई का मिला जवाब

हालांकि 2000 रुपये के नोट को लेकर आशंकाओं और सरकार की ओर से उनका लगातार खंडन करने के बीच एक आरटीआई दायर किया गया और मामले की सच्चाई जानने की कोशिश की गई. इस मामले में एक निजी चैनल द्वारा रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया से सूचना के अधिकार के तहत 2000 रुपये के नोट पर जानकारी मांगी गई. इसका जवाब सिक्योरिटी प्रिंटिंग एंड मिंटिंग कॉरपोरेशन ऑफ इंडिया लिमिटेड की ओर से दिया गया कि जो कि भारत सरकार के पूर्ण स्वामित्व वाली कंपनी है. ये कंपनी करंसी नोट छापने के अलावा सिक्कों को भी ढालती है.

जवाब में कहा गया कि 2000 रुपये के करंसी नोटों को प्रिंट करने के लिए आरबीआई की ओर से एसपीएमसीआईएल को कोई मांग नहीं भेजी गई है. इसमें आगे कहा गया है कि मौजूदा समय में एसपीएमसीआईएल सिर्फ 500 रुपए के नए नोटों और कम मूल्य के नोट प्रिंट कर रही है

करंसी वाले नोटों की प्रिंटिंग के लिए सरकार की नोडल ईकाई एसपीएमसीआईएल फिलहाल 2000 रुपए के नोट प्रिंट नहीं कर रही है. करंसी और नोटों का नियमन करने वाली RBI ने 2000 रुपए के नोट प्रिंट नहीं करने के लिए कहा है.

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अब देखने वाली बात ये है कि एसपीएमसीआईएल के जवाब से ये साफ नहीं हुआ कि क्या 2000 रुपए के नोट प्रिंट नहीं किए जाना अस्थाई है या स्थाई.

बड़ा सवाल ये भी है कि अगर 2000 रुपए के नोटों को प्रिंट करना बंद कर दिया गया है और इससे छोटे मूल्य के नोटों को ज्यादा सर्कुलेशन में लाया जा रहा है, तो ऐसी सूरत में 2000 रुपए के नोट चरणबद्ध ढंग से प्रचलन से बाहर हो सकते हैं.

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