‘पद्मावती’ की मुश्‍किलें हैं कि कम होने का नाम ही नहीं ले रही हैं। एक के बाद एक फिल्‍म को लेकर नया बवाल खड़ा हो जाता है। अब देखिए न, इस बार 1 दिसंबर को फिल्‍म की रिलीज पर रोक लग गई है। वहीं इससे भी ज्‍यादा चौंकाने वाली बात ये है कि इस बार इसके रिलीज पर रोक लगी है सेंसर बोर्ड की वजह से।

ऐसी है जानकारी
गौरतलब है कि संजय लीला भंसाली की फिल्म ‘पद्मावती’ को लेकर मुसीबतें थमने का नाम ही नहीं ले रही हैं। शुक्रवार को मेकर्स ने इस फिल्म को पास कराने के लिए सीबीएफसी में आवेदन दिया था, लेकिन उसके कुछ ही घंटों बाद सेंसर बोर्ड ने ये फिल्म वापस लौटा दी।


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मेकर्स को लौटाया फिल्‍म को
वैसे बताया जा रहा है कि सेंसर ने अपनी ऑनलाइन प्रक्रिया के जरिए ही इस फिल्म को लौटा दिया। फिल्म के सर्टिफिकेशन के लिए आवेदन फॉर्म का पूरी तरह से भरा न होने का हवाला देते हुए सेंसर बोर्ड ने ये फिल्म इसके मेकर्स को वापस लौटा दी है।

ऐसे इस्‍तेमाल किया जा रहा है पॉलिसी को
सेंसर के इस रवैये को देखते हुए कहा जा रहा है कि 68 दिन में फिल्म पास कराने की ये पॉलिसी असल में जानबूझकर गलत तरीके से इस्तेमाल की जा रही है। ऐसा इसलिए ताकि ‘पद्मावती’ को समय से रिलीज न किया जाए।

वोट बैंक का है ये चक्‍कर
वैसे बता दें कि गुजरात में जल्द ही चुनाव होने है। ऐसे में कोई भी पॉलिटिकल पार्टी अपना वोट बैंक नहीं गंवाना चाहती है। इस वजह से सेंसर बोर्ड को पॉलिटिकल पार्टियों ने सलाह दी है कि ‘पद्मावती’ को पास करने की प्रक्रिया धीमी रखी जाए।

ऐसी मिली है जानकारी
सूत्रों से मिली जानकारी पर गौर करें तो पता चला है कि सेंसर बोर्ड के ज्यादातर ऑफिसर्स वीडियो फिल्म्स और फीचर फिल्मों को पास करने के काम में लगे हुए हैं। ऐसे में अगर दूसरी फिल्मों के पास करने की प्रक्रिया धीमी रखी जाती है तो ‘पद्मावती’ के रिलीज में अपने आप ही देरी होगी। अब क्योंकि सभी आवेदन ऑनलाइन भरे जा रहे हैं तो ऐसे में ‘पद्मावती’ को भी कतार में रहकर अपनी बारी के आने का इंतजार करना होगा।

सूत्रों के हवाले से मिली है ये खबर
अंदरूनी सूत्रों ने बताया कि सिनेमाटोग्राफ एक्ट 1983 के रूल 42 के अनुसार अगर सेंसर के चेयरपर्सन चाहें तो वो किसी फिल्म को इस 68 दिन वाली प्रक्रिया से आजादी दे सकते हैं। चेयरपर्सन को इसके पीछे की वजह लिखित में देकर बताना होगा कि इससे क्यों पास किया जा रहा है। अगर चेयरमैन को लगता है कि फिल्म में ऐसी आपत्तिजनक कोई सीन या डायलाग नहीं है तो उसे आगे की मेहनत से बचाते हुए जल्द से जल्द पास किया जा सकता है।

लगाया गया है इन्‍हें काम पर
वहीं प्रसून जोशी इस कानून का फायदा उठाकर बॉलीवुड और हॉलीवुड प्रोड्यूसर का मुंह बंद करने के लिए उन्हें काम पर लगा रहे हैं। अगर सिनेमाटोग्राफ के रूल 41 को देखा जाए तो फिल्मों को पास कराने की प्रक्रिया 68 दिनों से भी काफी कम की है।

जताई जा रही है इस बात की आशंका
सेंसर की ओर से फिल्म के लौटाए जाने के बाद इसके रिलीज के स्थगित होने की भी आशंका जताई जा रही है, लेकिन इन बातों को खारिज करते हुए ‘पद्मावती’ को प्रोड्यूस करने वाली वायकॉम 18 मोशन पिक्चर्स के अजित अंधरे ने कहा, ‘हम सेंसर बोर्ड के लिए इस फिल्म के स्क्रीनिंग की प्रतीक्षा कर रहे हैं। एक बार स्क्रीनिंग हो जाए तो इस फिल्म को लेकर जो असमंजस बना हुआ है वो खत्म हो जाएगा। मुझे यकीन है कि हमें इसकी रिलीज डेट नहीं टालनी होगी।‘

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