1995 में रिलीज हुई फिल्‍म ‘दिलवाले दुल्‍हनिया ले जाएंगे’ तो दर्शकों को बहुत अच्‍छे से याद होगी। वही फिल्‍म जो इतने सालों बाद भी अपने फैन्‍स के दिलों पर जैसे के तैसे ही राज कर रही है। यही नहीं जिस फिल्‍म ने एक ही थिएटर में 20 साल तक टिके रहने का रिकॉर्ड बना लिया। उसी ब्‍लॉकबस्‍टर फिल्‍म से अब कुछ ऐसे सीन्‍स आए हैं सामने, जिनको शूट तो किया गया था, लेकिन फिल्‍म रिलीज के वक्‍त उन्‍हें काट लिया गया। कहने का मतलब है कि आज हम आपको बताने जा रहे हैं फिल्‍म ‘दिलवाले दुल्‍हनिया ले जाएंगे’ के कुछ ऐसे सीन्‍स के बारे में, जो आपको फिल्‍म में नहीं दिखाई दिए।

गौर करिए इस सीन पर
फिल्म का ऐसा ही एक सीन है जहां सिमरन यानी कि काजोल गोरा बनने के लिए मुंह छिपाकर स्टीम लेती नजर आती हैं। इस पर उनकी मां यानी कि फरीदा जलाल आकर उनसे कहती हैं- तुझे क्या जरूरत है अपना रंग साफ करने की, और साफ हो भी गया तो तुझे कौन सा क्वीन एलिजाबेथ बनना है। अपने देश ही तो वापस जाना है ना। वहां गेहूं जैसा रंग बहुत पसंद करते हैं। जैसा तेरा है। फिल्‍म रिलीज होते वक्‍त इस सीन पर कैंची चला दी गई थी।


हमसे फेसबुक पर भी जुड़ें!


ये था वो दूसरा सीन
ऐसा ही एक दूसरा सीन था जिसमें सिमरन के पिता बलदेव सिंह चौधरी यानी कि अमरीश पुरी, उनकी पत्‍नी और छोटी बेटी पूजा करते नजर आते हैं। हालांकि सिमरन पूजा के लिए लेट हो जाती हैं, लेकिन वो भागती-भागती आती हैं। इसके बाद में डोरबेल बजती है तो बलदेव सिंह दरवाजा खोलने चले जाते हैं। तभी सिमरन की छोटी बहन चुटकी उसे ताना मारते हुए कहती है, ‘फिर से लेट, वैरी बैड।‘

तीसरा सीन था कुछ ऐसा
फिल्‍म का ऐसा ही काटा हुआ तीसरा सीन था जिसमें सिमरन जब यूरोप ट्रिप पर जाती है तो उसके पिता बलदेव सिंह उसे छोड़ने स्टेशन आते हैं। वो सिमरन से कहते हैं- मैं जानता हूं बेटा कि तुम बड़ी हो गई हो। अपने अच्छे-बुरे में फर्क कर सकती हो। फिर भी पहली बार तुम इतनी दूर, इतने दिनों के लिए जा रही हो। इसलिए दिल डरता है कि कहीं कोई ऐसी-वैसी बात न हो जाए। बस बेटा- मेरे भरोसे को कभी शर्मिंदा मत करना।

ऐसा था चौथा सीन
ऐसा ही एक और चौथा सीन था जिसमें सिमरन रात में छिपते हुए टैरेस पर राज से मिलती हैं। यहां राज (शाहरुख) सिमरन (काजोल) से कहता है- सिमरन तुम मेरा इम्तिहान क्यों ले रही हो। सबकी सहमति है सिर्फ तुम्हारे बाप को छोड़कर। एक ढंग का बाप नहीं चुन सकती थीं तुम। सारे के सारे बापों में तुम्हें एक यही बाप मिला। तुम नहीं जानती कि उनका और मेरा कितना पुराना रिश्ता है। मैं 100 तीर्थ यात्राएं भी कर लूं तो कोई फर्क नहीं पड़ने वाला।

पांचवे सीन में लगाना था मल्‍हम
अगला ऐसा सीन था जहां सिमरन को इम्प्रेस करने के लिए राज को कुलजीत से मार खानी थी, लेकिन यहां उल्टा हो जाता है। यानी राज कुलजीत को खूब मारता है। पिटाई से कुलजीत बिस्तर पर पड़ा रहता है। इसके बाद सिमरन मल्हम लेकर आती है और राज और कुलजीत के दोस्तों के सामने ही उसे मल्हम लगाती है। सिमरन कहती है- कितनी बेदर्दी से मारा है। सारे बदन पर नील पड़ गए हैं। वहीं दूसरी ओर कुलजीत की बहन प्रीति (मंदिरा बेदी) भी राज को मल्हम लगाने लगती है।

ये था वो छठा सीन
अगले ऐसे सीन में सिमरन की मां लाजो अपने पति से सिमरन और राज के प्यार वाली बात बता देती है। लाजो कहती है- आपने मुझसे पूछा था कि सिमरन उसे भूली है कि नहीं और मैंने कहा था कि वो आहिस्ता-आहिस्ता सब भूल जाएगी। मैं गलत थी। वो उसे भूली नहीं है। वो उससे अब भी बहुत प्यार करती है। अगर सिमरन उसे इतना प्यार करती है, तो आपको नहीं लगता कि हमें एक बार उससे पूछ लेना चाहिए। शायद लड़का बहुत ही अच्छा हो। लाजो की ये बातें सुन बलदेव सिंह भड़क जाते हैं और कहते हैं- सिमरन से ज्यादा आज तुमने मुझे शर्मिंदा किया है।

ऐसा था वो सातवां सीन
ऐसे अगले सातवें सीन में राज सिमरन को कहानी सुना रहा है। लड़का बिल्कुल अकेला खड़ा हुआ था। ट्रेन चलने वाली थी, सीटी भी बज चुकी थी। तभी लड़की दिखाई दी। दूर से भागी चली आ रही थी। ट्रेन चलने लगी छुक-छुक छुक-छुक। लड़की भी उसके साथ भागने लगी और फिर उसने अपना हाथ बढ़ाया। लड़के ने उसका हाथ पकड़कर खींच लिया। इतने में सिमरन की चाची ने पूछा- आगे क्या हुआ। इस पर राज ने कहा- आगे एक बुड्ढा आ गया। लड़की का बाप।

जे पसंद आया?
तो हम भी पसंद आएंगे, ठोको लाइक

Follow on Twitter!
loading...