चलिए ‘पद्मावती’ के सिर पर मंडरा रहे बादल कुछ तो कम हुए। कोर्ट ने इसकी राह को बना दिया है आसान। जी हां, आप सही सुन रहे हैं। तमाम बवालों से फिलहाल पद्मावती को राहत मिल गई है। फिल्‍म के खिलाफ दायर याचिका को कोर्ट ने सिरे से खारिज कर दिया है। क्‍या रहा इसके एवज में कोर्ट का जवाब, आइए गौर करें।

ऐसी है जानकारी
संजय लीला भंसाली और उनके फैन्‍स के लिए गुड न्‍यूज ये है कि सुप्रीम कोर्ट ने ‘पद्मावती’ की रिलीज पर रोक लगाने की मांग संबंधी याचिका खारिज कर दी है। इसको लेकर कोर्ट ने कहा है कि सेंसर बोर्ड ने अभी इस फिल्म को सर्टिफिकेट जारी नहीं किया है। वह एक इंडिपेंडेंट बॉडी है। ऐसे में सुप्रीम कोर्ट को उसके अधिकार क्षेत्र में दखल नहीं देना चाहिए।


हमसे फेसबुक पर भी जुड़ें!


ऐसा लगा है आरोप
बता दें कि संजय लीला भंसाली के डायरेक्शन और दीपिका पादुकोण के लीड रोल वाली इस फिल्म का विरोध किया जा रहा है। राजस्थान में करणी सेना, बीजेपी लीडर्स और हिंदूवादी संगठनों ने इतिहास से छेड़छाड़ का आरोप लगाया है।

पढ़ें इसे भी : शॉर्ट ड्रेस में बीवी की फोटो क्‍या खींच ली, अभिषेक ने तो इनको धो डाला

कमेटी बनाने की उठाई मांग
चीफ जस्टिस दीपक मिश्रा, जस्टिस एएम खालविलकर और डीवाय चंद्रचूड की बेंच सिद्धराज सिंह चूडास्मा और 11 अन्य लोगों की पिटीशन पर सुनवाई कर रही थी। इसको लेकर पिटीशनर की मांग थी कि मशहूर हिस्टोरियंस की एक कमेटी बनाई जाए।

कमेटी से की ऐसी गुजारिश
वह कमेटी फिल्म की स्क्रिप्ट जांचे, ताकि रानी पद्मावती की जिंदगी के बारे में कुछ गलत प्रस्‍तुत न किया जा सके।
ऐसे में पिटीशनर्स ने फिल्म की रिलीज पर तब तक रोक लगाने की मांग की थी, जब तक कि इसमें की जा रही कथित ऐतिहासिक भूल को डायरेक्टर सुधार नहीं लेते।

पढ़ें इसे भी : लो, अब नवाजुद्दीन की पूर्व गर्लफ्रेंड ने उनके सिर पर तोड़ा मुसीबतों का पहाड़ 

ऐसा हो रहा है विरोध
याद दिला दें कि राजपूत करणी सेना इस फिल्‍म का विरोध कर रही है। इसकी शुरुआत राजस्थान में शूटिंग के वक्त हुई थी। सेना का मानना है कि ​इस फिल्म में पद्मिनी और खिलजी के बीच इंटीमेट सीन फिल्माए जाने से उनकी भावनाओं को ठेस पहुंची है, जिसके चलते काफी समय से इसका विरोध हो रहा है। यही नहीं शूटिंग के वक्त राजपूत करणी सेना ने कई जगह प्रदर्शन किया था और पुतले फूंके थे।

गुजरात बीजेपी ने कहा था ऐसा
गुजरात बीजेपी ने कहा था कि फिल्म क्षत्रिय समुदाय की भावनाओं को ठेस पहुंचा सकती है। लिहाजा फिल्म को रिलीज से पहले पार्टी के राजपूत प्रतिनिधियों को दिखाया जाना चाहिए। ऐसा करने से रिलीज के वक्त फिल्म के लिए सहूलियत रहेगी और तनाव के हालात से बचा जा सकेगा।

जे पसंद आया?
तो हम भी पसंद आएंगे, ठोको लाइक

Follow on Twitter!
loading...