शरीर आग की चपेट में आ जाए तो जितनी जलन होती है, उससे भी ज्यादा कष्ट बाद में देते हैं त्वचा पर पड़े निशान। इस समस्या का निदान अब वैज्ञानिकों ने ढूंढ़ लिया है। अब ऐसी बनावटी त्वचा तैयार की है जो मनुष्य की असली त्वचा की तरह ही संवेदनशील है।

तापमान में अंतर भी पहचानेगी

इस त्वचा को दक्षिण कोरिया के वैज्ञानिकों ने तैयार किया है। उनके मुताबिक यह इतनी संवेदनशील है कि इसका इस्तेमाल करने वाले लोग किसी वस्तु की बनावट और उसके तापमान में किसी भी तरह के अंतर को बखूबी पहचान सकते हैं।

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असली त्वचा के जैसा काम

बनावटी त्वचा उसी तरह वस्तुओं के दबाव और तापमान में फर्क करती है, जिस तरह असली त्वचा हवा के हल्के से स्पर्श से ठंडे और गर्म वातावरण का अंतर समझ लेती है। यही नहीं, इसे छूने पर आप यह फर्क नहीं कर पाएंगे कि यह इंसान की असली त्वचा से अलग है।

मानव शरीर जितना ही तापमान

साथ ही साथ इसका तापमान इंसान के शरीर के तापमान के बराबर यानी 98 फारेनहाइट रखा गया है। वैज्ञानिकों ने प्लास्टिक की एक गुड़िया को जब इस बनावटी त्वचा से छुआ तो इसने गुड़िया में इतनी ऊष्मा स्थानांतरित की जितनी एक इंसान का हाथ करता है।

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दिमाग तक पहुंचाएगी संदेश

इसके पहले जितनी त्वचा बनाई गई थीं वे इंसान के मस्तिष्क से संदेश तो प्राप्त कर लेती थीं, लेकिन त्वचा में होने वाली उत्तेजना से जो संदेश प्राप्त होते थे उन्हें वह मस्तिष्क तक नहीं पहुंचा पाती थीं। नई त्वचा यह काम भी आसानी से कर लेगी।

सिलिकॉन से किया तैयार

बनावटी त्वचा को पारदर्शी सिलिकॉन पदार्थ ‘पॉलीडायमिथाइलसिलोक्सेन’ से तैयार किया गया है। इसमें मौजूद सिलीकॉन के नैनो रिबन यह पता लगाते हैं कि इसके संपर्क में आने वाली कोई वस्तु ठंडी है या गर्म।

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