जया एकादशी व्रत अन्य सभी व्रतों में अत्यधिक महत्व का माना गया है। जया एकादशी व्रत माघ मास की शुक्लपक्ष दशमी को पड़ती है। इस बार जया एकादशी व्रत 28 जनवरी (रविवार) को है। जया एकादशी व्रत की मान्यता है कि इस दिन व्रत रखने से समस्त पापों का निवारण हो जाता है। शास्त्रों में जया एकादशी व्रत को चंद्रमा से भी जोड़ा गया है। जया एकादशी व्रत चंद्रमा के हर प्रभाव के लिए अत्यंत लाभकारी है।

यहां तक कि इस एकादशी का व्रत सभी ग्रह दोषों से मुक्ति के लिए भी लाभकारी साबित होता है। इतना ही नहीं इस एकादशी व्रत का प्रभाव व्यक्ति के मन-मस्तिष्क और शरीर दोनों पर पड़ता है। परंतु एक एकादशी का लाभ तभी मिलता है जब कि पूरे विधि-विधान से इस व्रत को किया जाता है। इस एकादशी के नियमों का पालन करने पर इसका लाभ चार गुना अधिक मिलता है। शास्त्रों के अनुसार जया एकादशी के ये महत्व है।

जया एकादशी व्रत


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व्रत महत्व

शास्त्रों में एकादशी को शरीर और मन को एकाग्र करने वाला माना गया है।
माघ मास शुक्ल एकादशी अर्थात जया एकादशी को के व्रत को करने से समस्त पापों का नाश होता है।
जया एकादशी का व्रत व्यक्ति को संस्कारों को पवित्र करता है।
इस व्रत को विधि पूर्वक करने से मनुष्य भूत-पिशाच आदि योनी से मुक्ति पा जाता है।

व्रत विधि

शास्त्रों के अनुसार इस व्रत को निर्जला ही रखना सर्वोत्तम माना गया है।
इस व्रत को उन्हें ही जलाहारी रखना चाहिए जो पूर्ण रूप से स्वस्थ हो।
इस व्रत के दौरान प्रातः काल में विष्णु की पूजा करनी चाहिए।
इस व्रत में फलों और पंचामृत का भोग लगाना चाहिए।
इस व्रत के दौरान के वाल फल और जल का सेवन करना अच्छा माना गया है।

व्रत में न करें ये काम

इस व्रत के दौरान तामसिक आहार नहीं करना चाहिए।
मन में बुरे विचार लाने से भी बचना चाहिए।
बिना कृष्ण की पूजा किए दिन की शुरुआत नहीं करें।

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