टीम इंडिया के पूर्व क्रिकेटर गुंडप्पा विश्वनाथ 12 फरवरी को 69 साल (जन्म- 1949) के हो गए। साल 1949 में मैसूर में जन्मे विश्वनाथ भारत के प्रमुख बैट्समैन के अलावा कप्तान भी रहे हैं। टीम इंडिया के लिए 91 टेस्ट खेल चुके विश्वनाथ की सेन्चुरी को टीम इंडिया के नहीं हारने की गारंटी माना जाता था। दरअसल अपने टेस्ट करियर में उन्होंने 14 सेन्चुरी लगाई और इनमें से एक भी मैच टीम इंडिया नहीं हारी। इसी वजह से उनके शतक को टीम के लिए बेहद लकी माना जाता था।

गुंडप्पा विश्वनाथ

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विश्वनाथ दुनिया के उन चुनिंदा चार क्रिकेटर्स में से एक हैं जिन्होंने जीरो से टेस्ट डेब्यू किया और फिर उसी मैच में सेन्चुरी भी लगा दी। विश्वनाथ ने नवंबर 1969 में ऑस्ट्रेलिया के खिलाफ कानपुर टेस्ट में डेब्यू किया था। इस मैच की पहली ही इनिंग में जहां वे जीरो पर आउट हो गए थे, तो वहीं दूसरी इनिंग में उन्होंने सेन्चुरी (137) लगाई थी। अपने टेस्ट करियर में गुंडप्पा विश्वनाथ ने 91 मैच खेले और 6080 रन बनाए। इसके अलावा वनडे करियर में उन्होंने 25 मैच खेलकर 439 रन बनाए।

स्लिप के बेहतरीन फील्डर रहे गुंडप्पा का फेवरेट शॉट स्क्वेयर कट रहा। उन्होंने अपने करियर में 14 टेस्ट सेन्चुरी लगाने के अलावा 35 फिफ्टी भी लगाई। गुंडप्पा विश्वनाथ के वक्त में ऑस्ट्रेलिया और वेस्ट इंडीज के फास्ट बॉलर्स का खौफ जमकर था, लेकिन पेस अटैक का सामना करने में महारथ रखने वाले गुंडप्पा ने इन दोनों टीमों के खिलाफ 50+ के एवरेज से रन बनाए।

टीम इंडिया को दी ‘द वॉल’

गुंडप्पा ने साल 1983 में टेस्ट क्रिकेट से रिटायरमेंट ले लिया। इसके बाद वे बेंगुलुरु स्थित नेशनल क्रिकेट अकेडमी से जुड़ गए। बीसीसीआई की नेशनल सिलेक्शन कमिटी के चेयरमैन रहते हुए उन्होंने ही 1996 में सौरव गांगुली और राहुल द्रविड़ का सिलेक्शन इंग्लैंड टूर के लिए टीम में किया। इसके बाद साल 1999 से 2004 के बीच वे ICC मैच रैफरी भी रहे।

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