भारतीय महिला मुक्केबाजों ने आईबा विश्व महिला युवा मुक्केबाजी चैंपियनिशप में रविवार को गुवाहाटी में ऐतिहासिक प्रदर्शन कर चार स्वर्ण पदक जीते। विश्व चैंपियनशिप में नीतू (48 किग्रा), ज्योति (51 किग्रा), साक्षी (54 किग्रा), शशि चोपड़ा (57 किग्रा) व अंकुशिता बोरो (64 किग्रा) ने ये पंच जड़े।

2011 में भारत को मिला था एकमात्र सोना

2011 में एकमात्र स्वर्ण पदक हासिल करने वाले मेजबान भारत ने इस चैंपियनशिप के इतिहास में अपना सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन किया है। भारत के लिए सबसे पहले नीतू रिंग में उतरीं। उन्होंने फाइनल में कजाखस्तान की झाजीरा उराकबायेवा को हराकर स्वर्ण पदक जीता।


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सरजूबाला देवी के बाद नीतू ने दिलाया स्वर्ण

नीतू ने  2011 में सरजूबाला देवी के स्वर्ण के बाद भारत को इस प्रतियोगिता में पहला स्वर्ण पदक दिलाया। कजाखस्तान की मुक्केबाज का फुटवर्क भी अच्छा नहीं था और वह अपना संतुलन बनाये रखने में भी जूझ रही थी।

इन्होंने भी स्वर्ण पदक पर जमाया जोर का मुक्का

नीतू के बाद ज्योति और साक्षी ने भी रिंग में कमाल दिखाया और स्वर्ण पदक पर कब्जा किया। ज्योति और साक्षी को भी जीत हासिल करने में ज्यादा मशक्कत नहीं करनी पड़ी। भारत को विश्व चैंपियनशिप का चौथा स्वर्ण पदक शशि चोपड़ा ने और पांचवां अंकुशिता ने दिलाया।

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स्टैंड में लगी आग से रोकना पड़ा मुकाबला

शशि ने विश्व चैंपियनशिप के खिताबी मुकाबले में वियतनाम की मुक्केबाज डो होंग को आसानी से शिकस्त दी। वहीं, फाइनल के दौरान दर्शकों के एक स्टैंड में बिजली की तार में आग लगने के कारण लगभग 45 मिनट तक खेल रोकना पड़ा। नीतू के 48 किग्रा वर्ग में मुकाबले के बाद यह घटना घटी।

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