पुरानी कहावत है कि मेहनत करने वालों की ऊपर वाला जरूर सुनता है। बेशुमार पैसों से भरे खेल क्रिकेट में भी यह बात लागू होती है। जितने भी खिलाडि़यों ने क्रिकेट की बुलंदियों को छुआ, उन्होंने खूब मेहनत की। इसमें पुरानी और नई दोनों ही पीढि़यों के खिलाड़ी हैं। भारतीय क्रिकेट टीम में ऐसे कई खिलाड़ी हैं, जो अपनी मेहनत के बूते नए मुकाम पर पहुंच चुके हैं। इनमें से एक खिलाड़ी ऐसे भी हैं, जिनके पास शुरुआती दिनों में जूते तक नहीं थे, लेकिन आज वो अपनी तेज गेंदबाजी से विपक्षी टीम को पसीना छुड़ा देते हैं।

भुवनेश्‍वर कुमार के पिता यूपी पुलिस में सब इंस्पेक्टर हैं। जब भुवनेश्‍वर ने बताया कि वह क्रिकेट में करियर बनाना चाहते हैं, तब उनका परिवार गांव से मेरठ शहर आया। शुरुआती दिनों में भुवनेश्‍वर के लिए क्रिकेट मुश्किल साबित हो रहा था। उनके पास ज्यादा पैसे नहीं हुआ करते थे। भुवी अपनी भारी-भरकम क्रिकेट किट कंधे पर टांगकर पैदल खेल मैदान तक जाते थे। उस दौर में एक बार भुवी के पास पहनने को जूते तक नहीं होते थे। तब उनकी बहन ने जूते खरीदकर उन्हें दिए थे।


हमसे फेसबुक पर भी जुड़ें!


हैदराबाद के मोहम्मद सिराज हाल में तब सुर्खियों में आए, जब उन्हें न्यूजीलैण्‍ड के खिलाफ टी-20 सीरीज के लिए टीम में चुना गया। सिराज और उनका परिवार बंजारा हिल्स इलाके में किराए के छोटे घर में रहता है। सिराज के पिता गौस मोहम्मद 30 साल से रिक्शा ड्राइवर हैं। बता दें कि आईपीएल में सिराज को सनराइजर्स हैदराबाद ने 2.6 करोड़ की बोली लगाकर खरीदा है।

उमेश यादव विदर्भ से पहले प्लेयर हैं, जिन्होंने टीम इंडिया के लिए खेला है। उनके पिता कोयले की खदान में काम करते हैं। उमेश का बचपन नागपुर के ग्रामीण इलाकों में गुजरा है। साल 2007 के पहले उमेश सिर्फ टेनिस बॉल से क्रिकेट खेलते थे। इसके बाद उन्होंने प्रोफेशनल क्रिकेटर के तौर पर खेलना शुरू किया। उमेश ने क्रिकेट से पहले पुलिस में ज्वाइन करने का भी आवेदन किया था।

महेंद्र सिंह धोनी के बारे में कौन नहीं जानता। उनकी जिंदगी पर फिल्म भी बन चुकी है। धोनी के पिता पान सिंह पब्लिक सेक्टर में छोटी सी नौकरी करते थे। खुद महेंद्र सिंह धोनी रेलवे में ट्रेन टिकट एक्जामिनर थे। उन्होंने खड़गपुर रेलवे स्टेशन पर कुछ साल काम किया था। लेकिन अचानक उनकी जिंदगी का पहिया तेजी से घूमा और उन्हें खेलने का मौका मिल गया।

विरेंदर सहवाग अनाज व्यापारी पिता के बेटे हैं। हरियाणा के जाट परिवार में पैदा हुए विरेंदर संयुक्त परिवार में रहते थे। उनके 16 भाई-बहन हैं। जब विरेंदर ने कॉलेज में एडमिशन लिया, तब उन्हें क्रिकेट खेलने का चस्का चढ़ा। अपने इस शौक को पूरा करने के लिए विरेंदर रोज 84 किलोमीटर तक बस का सफर करते थे। इसके बाद वो स्पोर्ट ग्राउंड पहुंचकर क्रिकेट खेलते और फिर इतनी ही दूरी तय कर घर लौटते थे।

जे पसंद आया?
तो हम भी पसंद आएंगे, ठोको लाइक

Follow on Twitter!
loading...