वुहान: भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी अपनी दो दि‍वसीय यात्रा पर गुरुवार देर रात चीन पहुंच गए। वुहान एयरपोर्ट पर विदेश मंत्रालय के असिस्टेंट मिनिस्टर कॉग जुआंगयू और हुबेई के वाइस गवर्नर टॉग डाओचा ने उनका स्‍वागत कि‍या। मोदी वुहान में आयोजित होने वाले शिखर सम्मेलन में चीनी राष्‍ट्रपति‍ शी जिनपिंग से मुलाकात करेंगे। आपको बता दें कि‍ यह बैठक अनौपचारि‍क होगी। यानी इसके बाद कि‍सी तरह का संयुक्‍त बयान जारी नहीं कि‍या जाएगा। वर्ष 2014 में सत्‍ता संभालने के बाद मोदी की यह चौथी चीन यात्रा है।

नरेंद्र मोदी

मोदी और जि‍नपिंग की मुलाकात के दौरान दोनों ओर का प्रतिनिधिमंडल मौजूद रहेगा। दोनों नेता शनिवार को ईस्ट लेक जाएंगे और नौका की सवारी करेंगे। इस दौरान ईस्ट लेक गेस्ट हाउस में चर्चा भी होगी। भारत और चीन द्विपक्षीय संबंधों में आए तनाव को दूर करने की भरसक कोशिश करेंगे। एशिया के दो दिग्गज देशों के बीच आपसी अविश्वास का इतिहास रहा है। दोनों देशों के बीच 2017 में डोकलाम विवाद को लेकर स्थिति और तनावग्रस्त हो गई थी। लेकिन मोदी और शी जिनपिंग की यह बैठक आपसी संबंधों को नए सिरे से शुरू करने की एक कोशिश है।


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मड़िया रिपोर्ट के मुताबिक, भारत चीन के साथ और चीन भारत के साथ लंबे समय तक मुंह मोड़ ले या आपने संबंधों को खत्‍म कर ले। इकोनॉमी, कॉमर्स, डिप्‍लोमेसी समेत मौजूदा समय में ऐसे बहुत से मसले हैं, जहां भारत को चीन की और चीन को भारत की जरूरत है।
कई आर्थिक मंचों पर दोनों देश साथ काम कर रहे हैं। ऐसे में विरोध के समय दोनों देश अपनी अपनी चालें चलेंगे, लेकिन इसके बाद भी साथ-साथ काम करना पड़ेगा। दोनों की अपनी आर्थिक जरूरत और जियो पॉलिटिकल मजबूरियां हैं। आइए इसी की पड़ताल करते हैं।

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