नई दिल्ली: नाबालिग से बलात्कार में फंसे आसाराम राहत मिलने की आस लगाए बैठे थे, मगर कोर्ट ने उन्हें दोषी करार दिया। इसी के साथ जेल से रिहा होने की उम्मीदों को झटका लगा। अब आसाराम बंदी से मुजरिम बन गया। जेल प्रशासन ने आसाराम को कैदी नंबर 130 बनाया है। नाबालिग से बलात्कार का केस दर्ज होने के बाद एक सितंबर 2013 को आसाराम की गिरफ्तारी हुई थी। पिछले चार साल, सात माह और 24 दिन से वह जोधपुर सेंट्रल जेल में बंद रहा। आसाराम जेल में बने अस्थाई कोर्टरूम में विचाराधीन बंदी के रूप में गया और बाद में सजायाफ्ता बनकर निकला।

आसाराम

मुजरिम करार होने के बाद अब आसाराम को आश्रम का खाना नहीं मिलेगा। अन्य कैदियों की तरह अब उसे जेल का खाना खाना पड़ेगा।जेल प्रशासन के सूत्रों के मुताबिक आसाराम शाम के वक्त खाना खाने की जगह सिर्फ दूध पीता है।आसाराम के साथ उसका सेवादार शरदचंद्र भी दोषी करार हुआ है, उसे कैदी नंबर 129 के रूप में पहचाना जाएगा।


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80 साल के आसाराम से जेल-प्रशासन पेड़-पौधों को पानी देने का काम कराने की सोच रहा है। वजह कि नियमानुसार आसाराम को ऐसे ही हल्के-फुल्के काम दिए जा सकते हैं। क्योंकि जेल मैन्युअल के मुताबिक 70 साल या अधिक के पुरुष कैदियों से श्रम नहीं कराया जा सकता। लड़की को आसाराम के आश्रम में भेजने वाली सेवादार शिल्पी महिला जेल में है। उसे कैदी नंबर 76 की पहचान दी गई है। इससे पहले आसाराम के साथ उसका सेवादार और रसोइया प्रकाश जेल में था। मगर कोर्ट ने उसे बरी कर दिया। खास बात है कि आसाराम को उसी वार्ड-बैरक में रखा गया है, जहां वह पहले से रहा है।

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