डेरा सच्चा सौदा के मुखिया गुरमीत राम रहीम को दुष्कर्म के मामले में सजा सुनाई जा चुकी है। आसाराम के मामले पर सुप्रीम कोर्ट ने गुजरात सरकार को फटकार लगाई है। कहा है कि मामले की जांच में तेजी लाई जाए। वहीं, एक और आश्रम संचालक रामपाल के खिलाफ फैसला सोमवार को टल गया।

सोमवार

सोमवार को सुनाया जाना था फैसला

हरियाणा के बरवाला स्थित सतलोक आश्रम के संचालक रामपाल के खिलाफ दो मामलों में हिसार कोर्ट में सोमवार को फैसला आना था। इसे कोर्ट ने मंगलवार तक टाल दिया है।पिछले बुधवार को सरकारी काम में बाधा डालने और लोगों को बंधक बनाने के मामले में रामपाल की कोर्ट में पेशी हुई थी।


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हिसार जेल में बंद हैं रामपाल

इन दोनों मामलों में रामपाल के अलावा प्रीतम सिंह, राजेंद्र, रामफल, विरेंद्र, पुरुषोत्तम, बलजीत, राजकपूर ढाका, राजकपूर और राजेंद्र भी आरोपी हैं। कबीरपंथी विचारधारा के समर्थक रामपाल देशद्रोह के मामले में हिसार जेल में बंद हैं। बरवाला में तीन साल पहले विवाद के बाद उन्हें पकड़ा गया था।

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2006 में दर्ज हुआ हत्या का केस

इससे पहले वर्ष 2006 में भी रामपाल पर हत्या का केस दर्ज हुआ था। सिंचाई विभाग में जूनियर इंजीनियर की नौकरी छोड़ रामपाल स्वामी रामदेवानंद महाराज के शिष्य बन गए और बाद में 21 मई 1995 को रामपाल ने सतलोक आश्रम की नींव रखी थी।

गुजरात सरकार को लगाई फटकार

वहीं, सुप्रीम कोर्ट ने जेल में बंद बलात्कार के आरोपी कथावाचक आसाराम के खिलाफ धीमी जांच को लेकर गुजरात सरकार को सोमवार को फटकार लगाई। जस्टिस एनवी रामन्ना और जस्टिस अमिताभ रॉय की पीठ ने पूछा कि पीड़ित से अभी तक पूछताछ क्यों नहीं की गई।

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शपथपत्र दायर करने का निर्देश

पीठ ने राज्य को इस संबंध में शपथपत्र दायर करने का निर्देश दिया। इसके साथ ही मामले की सुनवाई दीपावली के बाद के लिए स्थगित कर दी। कोर्ट ने 12 अप्रैल को गुजरात में निचली अदालत को निर्देश दिया था कि पीड़ित सूरत की दो बहनों समेत अभियोजन के 46 गवाहों के बयान दर्ज किए जाएं।

आसाराम को नहीं दी थी जमानत

इससे पहले, सुप्रीम कोर्ट ने राजस्थान व गुजरात में दर्ज यौन हिंसा के दो अलग-अलग मामलों में आसाराम को जमानत देने से इनकार कर दिया था। 30 जनवरी को आसाराम की याचिका खारिज करते हुए टिप्पणी की थी कि उन्होंने जमानत के लिए न्यायालय के समक्ष फर्जी दस्तावेज पेश किए।

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