2जी स्पेक्ट्रम आवंटन घोटाले के आरोप से ए राजा और कनिमोझी समेत सभी आरोपी भले ही बरी हो गए हों, कोर्ट के सवालों से देश की सर्वोच्च जांच एजेंसी सीबीआई नहीं बच पाई। अपने फैसले में सीबीआई स्पेशल कोर्ट ने कई अहम टिप्पणियां की हैं।

जांच एजेंसियों की कार्यशैली पर सवाल उठे

स्पेशल कोर्ट की इन टिप्पणियों से इस पूरे मामले में जांच एजेंसियों की कार्यशैली पर सवाल उठे हैं। स्पेशल कोर्ट में सुनवाई कर रहे न्यायाधीश ओपी सैनी ने सीबीआई पर कई गंभीर प्रश्नचिह्न खड़े किए हैं।

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अभियोजन पक्ष की दलीलें रहीं बेतुकी

उन्होंने कहा है कि जैसे-जैसे कोर्ट में 2जी स्पेक्ट्रम मामला आगे बढ़ता रहा, अभियोग पक्ष बेहद सजग रहा और बहस में सतर्कता के साथ दलीलें रखता पाया गया। वहीं, पूरी सुनवाई के दौरान यह समझना मुश्किल था कि अभियोजन पक्ष अपनी दलीलों से कोर्ट में क्या साबित करना चाह रहा था।

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सरकारी वकीलों में नहीं था कोई भी तालमेल

अभियोजन पक्ष बेहद कमजोर दलील पेश कर रहा था और मामले में सुनवाई पूरी होते तक कोर्ट को यह साफ हो गया कि अभियोजन पक्ष पूरी तरह दिशाहीन हो गया था। और तो और स्पेशल सरकारी वकील और सामान्य सरकारी वकील बिना किसी तालमेल के दलील देते पाए गए।

ऐसे खींचा मामला कि समझना ही मुश्किल हो गया

जज ने कहा कि टेलीकॉम मंत्रालय द्वारा पेश ज्यादातर दस्तावेज असंगठित थे और मंत्रालय के नीतिगत मुद्दे पूरे मामले को और पेचीदा कर रहे थे। मंत्रालय के अव्यवस्थित दस्तावेजों और नीतियों से संदेह पैदा होता है कि किसी ने 2जी स्पेक्ट्रम मामले को घोटाले का स्वरूप देने के लिए कुछ अहम तथ्यों को खास तरह पेश किया और कई तथ्यों को ऐसे स्तर तक खींचा गया कि मामले को समझ पाना नामुमकिन हो गया।

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