सुप्रीम कोर्ट ने बोतल बंद पानी अधिकतम खुदरा मूल्य (एमआरपी) से अधिक दाम पर बेचने पर रोक लगाने से इनकार कर दिया है। इससे पहले केंद्र सरकार ने होटल और रेस्टोरेंट में इसे एमआरपी से अधिक दाम पर बेचने से रोक लगाई थी।

इसलिए नहीं लगा सकते रोक

मामले की सुनवाई करते हुए सुप्रीम कोर्ट ने साफ किया कि वह होटलों और रेस्‍टोरेंट को इस तरह से नहीं रोक सकता क्‍योंकि यहां लोगों को बैठने के लिए जो जगह दी जाती है उसके लिए मालिकों ने पैसे खर्च किए हैं।

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टैक्स चोरी को मिलता बढ़ावा

इससे पहले केंद्र ने सुप्रीम कोर्ट को बताया कि रेस्टोरेंट, होटल व मल्टीप्लेक्सों में मिनरल वाटर (बोतल बंद पानी) पर छपी कीमत से ज्यादा रकम वसूलने पर मैनेजमेंट को जेल और जुर्माने की सजा हो सकती है। छपी कीमत से ज्यादा पैसे वसूल करना टैक्स चोरी को बढ़ावा देता है।

दायर की गई थी कोर्ट में याचिका

फेडरेशन ऑफ होटल एंड रेस्टोरेंट एसोसिएशन्स ऑफ इंडिया ने सुप्रीम कोर्ट में एक याचिका दाखिल की थी। इसके जवाब में उपभोक्ता मामलों के मंत्रालय ने कहा कि प्री-पैक्ड या प्री-पैकेज्ड प्रोडक्ट्स पर छपी कीमत से ज्यादा पैसे वसूलना लीगल मेट्रोलॉजी एक्ट के तहत अपराध है।

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यह है लीगल मेट्रोलॉजी एक्ट

बताते चलें कि लीगल मेट्रोलॉजी एक्ट की धारा-36 में कहा गया है कि यदि किसी व्यक्ति को प्री-पैकेज्ड प्रोडक्ट पर छपी हुई कीमत से ज्यादा की कीमत पर बेचते, बांटते या डिलीवर करते पाया गया, तो उसके इस पहले अपराध के लिए उसपर 25,000 का जुर्माना लगेगा।

बढ़ती जाती है अपराध की सजा

इसके बाद उसने दोबारा ये अपराध किया तो उसे 50,000 के जुर्माने का सामना करना पड़ सकता है। अगर उसने ऐसा करना जारी रखा तो उसे 1 लाख का जुर्माना या एक साल जेल या दोनों हो सकता है। बोतल बंद पानी भी इसके अंतर्गत आता है।

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