प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी अक्सर कहते रहे हैं कि सरकार में बैठे लोगों की जवाबदेही होनी चाहिए. शायद केन्द्रीय सूचना आयोग को उनकी ये बात एकदम सही लगी इसीलिए सीआईसी ने अब पीएम मोदी को जवाबदेही के लिए चुना है. सीआईसी जानना चाहता है कि अब तक पीएम मोदी अपने साथ सरकारी खर्च पर किस-किस को विदेश ले गए हैं. हालांकि इस तरह के सवालों का जवाब अब तक पीएमओ प्रधानमंत्री की सुरक्षा का हवाला देते हुए टालता रहा है, लेकिन अब लगता है कि सीआईसी आसानी से मानने वाला नहीं है.

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मोदी को जवाबदेही के लिए चुना


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हाल ही में मुख्‍य सूचना आयुक्‍त आरके माथुर ने सूचना का अधिकार कानून यानी आरटीआई के तहत दाखिल अर्जी पर ऐसे लोगों की सूची सौंपने के लिए कहा है जो साल 2014 से 2017 के दौरान प्रधानमंत्री की आधिकारिक विदेश यात्रा पर उनके साथ गए थे. अब तक सरकार द्वारा सूची न दिए जाने के कारणों को उन्होंने खारिज कर दिया है.

जुलाई 2017 में नीरज शर्मा ने आरटीआई कानून के तहत अर्जी दाखिल कर ऐसे लोगों की सूची की डिमांड की थी. लेकिन उन्‍हें लिस्‍ट नहीं सौंपी गई थी. नीरज ने आरटीआई में सरकारी खर्च पर पीएम मोदी के साथ जाने वाले निजी कंपनियों के सीईओ, मालिक, पार्टनर और अन्‍य अधिकारियों की सूचना की मांग की थी. इसके अलावा उन्‍होंने पीएम के साथ जाने वाले प्रतिनिधिमंडल का हिस्‍सा बनने वाले लोगों के चयन के मानकों के बारे में भी जानकारी की मांगी की थी.

इसका जवाब प्रधानमंत्री कार्यालय ने 1 सितंबर, 2017 को दिया था. इस जवाब में कहा गया था, ‘प्रधानमंत्री की देश और विदेश यात्राओं के बारे में पीएमओ की वेबसाइट पर जानकारी उपलब्‍ध है. सुरक्षा कारणों के चलते पीएम के साथ जाने वाले प्रतिनिधिमंडल के बारे में जानकारी नहीं दी जा सकती. आरटीआई कानून, 2005 के तहत ऐसी सूचना न देने की व्‍यवस्‍था है.’

इसके अलावा सदस्‍यों के चयन के तौर-तरीकों पर भी पीएमओ ने कोई जवाब नहीं दिया था. पीएमओ के रवैये से नाखुश नीरज ने 29 सितंबर, 2017 को दूसरी बार आवेदन किया. इसमें पीएमओ द्वारा सूचना देने में जानबूझ कर देरी करने का उन्‍होंने आरोप लगाया था. उस समय उन्‍होंने कहा था, ‘यदि पीएमओ के पास ऐसी जानकारी नहीं है तो उसे आरटीआई आवेदन लंबित नहीं रखना चाहिए था.’

साथ ही नीरज ने सीआईसी को बताया था कि वेबसाइट पर भी इसके बारे में जानकारी उपलब्‍ध नहीं थी. मुख्‍य सूचना आयुक्‍त आरके माथुर ने नीरज शर्मा की अर्जी स्‍वीकार की और पीएमओ को सूचना मुहैया कराने का आदेश दिया है. नीरज शर्मा ने पीएमओ के रवैये से नाराज होते हुए कहा कि डॉक्‍टर मनमोहन सिंह की सरकार, मोदी सरकार से ज्‍यादा पारदर्शी थी.

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