एक साल पहले 28 सितंबर की रात भारतीय सैनिकों ने एलओसी क्रॉस करके सर्जिकल स्ट्राइक को अंजाम दिया. रात 12.30 बजे से तड़के 4.30 बजे तक यानी चार घंटे चले इस ऑपरेशन में 38-40 आतंकी ढेर कर दिए गए. पाकिस्तान के कई कैम्प भारतीय सेना ने तबाह कर दिए. ये ऑपरेशन इंडियन आर्मी ने पीओके से तीन किलोमाटर अन्दर जाकर अंजाम दिया था. सैनिकों की वापसी में  मुश्किलें बहुत थीं, लेकिन भारत के इन वीर सपूतों ने अप्रतिम साहस का परिचय दिया और सकुशल लौट आये.

आर्मी चीफ ने उड़ा दीं पाकिस्तान की धज्जियाँ, फिर सर्जिकल स्ट्राइक का ऐलान

सैनिकों की वापसी


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सैनिकों की वापसी में पांच मुश्किलें

दरअसल भारतीय सेना की ओर से की गयी सर्जिकल स्ट्राइक 19 सितम्बर को हुए उरी हमले का बदला था. इस हमले में कई सैनिकों ने जान गंवाई थी. आइये जानते हैं वे पांच मुश्किलें, जो जवानों की वापसी में सामने आने वाली थीं, लेकिन इन जांबाजों ने उन्हें मात देकर सकुशल घर वापसी की.

11-12 कैम्पों में से 4 को किया टार्गेट

जिस इलाके में इंडियन आर्मी ने सर्जिकल स्ट्राइक की थी, उसमें 11-12 आतंकी कैम्प थे. लेकिन टार्गेट केवल 4 पर किया गया था. यानी बाकी के कैम्पों को अगर भनक भी लग जाती, तो स्थिति गंभीर हो सकती थी. इसलिए बड़ी ही सावधानी से इस ऑपरेशन को अंजाम दिया गया था.

500 मीटर दूर था टार्गेट

इस ऑपरेशन में एक बड़ी मुश्किल ये थी कि आतंकियों के जिन कैम्पों को निशाना बनाना था, वे भारतीय सैनिकों के अन्दर जाने के बाद भी उनसे 500 मीटर दूर थे. इसके अलावा ये टार्गेट पाक आर्मी की पोस्ट के काफी नजदीक था. किसी भी चूक का मतलब था जिंदगी से हाथ धो बैठना. ऐसे में ऑपरेशन तो विफल होता ही, साथ ही सैनिकों की जान भी जाती.

पहाड़ों की चढ़ाई की ओर से करनी थी वापसी

अपना काम बखूबी अंजाम देने के बाद एक सबसे बड़ी मुश्किल ये थी कि पहाड़ों की चढ़ाई के रास्ते से वापसी करनी थी. ऐसे में पाकिस्तान के सैनिकों की ओर से दागी गयी गोलियों की तरफ सैनिकों की पीठ होती. इसलिए पाकिस्तानियों की पोस्ट की पोजीशन की वजह से उन्हें आसानी से निशाना बनाया जा सकता था. इसलिए जिस रास्ते से घुसे उससे वापसी नहीं करनी थी और दूसरा लम्बा और घुमावदार रास्ता प्रयोग किया, वो रास्ता एंट्री के रास्ते से ज़्यादा सेफ था.

रात के अँधेरे में ऑपरेशन को अंजाम

इस पूरे ऑपरेशन में एक बड़ी चीज़ ये थी कि अपना पूरा ऑपरेशन रात में ही अंजाम देना था और वापस आना था. अँधेरे में जहां देखने में ही दिक्कत होती है तो ऐसे ऑपरेशन में और बुरे हालात होते हैं. अगर सामने वाले पर आपने वार किया और चूक गए तो दुश्मन को आपकी पोजीशन का पता चल जाना है और नुकसान आपका तय है . लेकिन भारतीय सेना ने अँधेरे में भी अपने काम को इतनी सफाई से अंजाम दिया कि दुश्मन को ऊपर जाने के बाद ही भनक लगी होगी कि हम अल्लाह को प्यारे हो गए.

कानों के पास से गुजरीं गोलियां

इंडियन आर्मी के सैनिक जब वापसी कर रहे थे उस समय पाकिस्तान की ओर से गोलियां बरसाई जाए लगीं. लेकिन भारतीय सैनिकों ने खुद को बड़ी सावधानी से बचाया. अगर चौकन्ने न होते तो शायद गोलियां शरीर को छलनी करती हुयी निकल जातीं. कुल मिलाकर ऑपरेशन को अंजाम दिया और भारतीय सैनिक सुरक्षित अपनी धरती पर वापस आ गए. इस पूरे  ऑपरेशन में टॉप कैंडिडेट्स को शामिल किया गया था.

पूरे मामले पर रॉ और आर्मी की नज़रें लगातार बनी हुयी थीं. एनएसए अजीत डोवल भी लगातार एक्टिव थे और आखिरकार सेना ने अपने सफल अभियान का सुबह ऐलान कर दिया था.

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