2जी घोटाले पर फैसले के बाद कांग्रेस के लिए एक और राहत भरी खबर आई है। मुंबई के हाईप्रोफाइल आदर्श सोसाइटी मामले में महाराष्ट्र के पूर्व मुख्यमंत्री अशोक चव्हाण को भी राहत मिल गई है। बॉम्बे हाईकोर्ट ने उन पर मुकदमा चलाने के आदेश को रद कर दिया है।

कोलाबा में बनाई गई थी सोसायटी

महाराष्ट्र सरकार ने मुंबई के कोलाबा में आदर्श हाउसिंग सोसायटी बनाई थी। इसको लेकर विवाद होने पर महाराष्ट्र के पूर्व मुख्यमंत्री अशोक चव्हाण पर राज्यपाल सी विद्यासागर ने मुकदमा चलाने का आदेश दिया था।


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सैनिकों की विधवाओं व रक्षा कर्मियों के लिए बनी

आदर्श हाउसिंग सोसायटी 31 मंजिला इमारत है। इसे युद्ध में मारे गए सैनिकों की विधवाओं और भारतीय रक्षा मंत्रालय के कर्मचारियों के लिए बनाया गया था।

आरटीआई से हुआ था घोटाले का खुलासा

बाद में आरटीआई से यह खुलासा हुआ कि नियमों को ताक पर रख सोसायटी के फ्लैट ब्यूरोक्रैट्स, राजनेताओं और सेना के अफसरों को बेहद कम दामों में बेच दिए गए। इसका पर्दाफाश 2010 में हुआ। इसके बाद तत्कालीन मुख्यमंत्री अशोक चव्हाण को इस्तीफा देना पड़ा था।

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हाईकोर्ट ने धोखेबाजी का मामला माना

21 दिसंबर 2010 को बॉम्बे हाईकोर्ट ने माना कि यह सीधे-सीधे धोखेबाजी का मामला है। इसके बाद कोर्ट ने सोसायटी को अंतरिम राहत देने से मना कर दिया। पर्यावरण नियम को दरकिनार करने से केंद्रीय पर्यावरण मंत्रालय ने इमारत को तीन माह में गिराने की सिफारिश की थी।

2013 में न्यायिक कमिशन ने दी रिपोर्ट

सोसायटी मामले की जांच के लिए 2011 में महाराष्ट्र सरकार ने दो सदस्यीय न्यायिक कमिशन बनाया था। इसकी अध्यक्षता हाईकोर्ट के रिटायर जस्टिस जेए पाटिल ने की। इस समिति ने 182 से ज्यादा गवाहों से पूछताछ की और अप्रैल 2013 में अपनी रिपोर्ट सौंप दी।

चार मुख्यमंत्रियों के नाम आए थे सामने

इस रिपोर्ट में था कि 25 फ्लैट गैरकानूनी तौर पर आवंटित किए गए थे। इनमें से 22 फ्लैट फर्जी नाम से खरीदे गए थे। इसमें महाराष्ट्र के चार पूर्व मुख्यमंत्रियों के भी नाम आए थे। इनमें अशोक चव्हाण, विलासराव देशमुख, सुशील कुमार शिंदे व शिवाजीराव निलंगेकर पाटिल थे।

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