डेरा सच्चा सौदा के मुखिया गुरमीत राम रहीम को 10 नहीं, पूरे 20 साल की सजा सुनाई गई है। दो साध्वियों से रेप के दो अलग-अलग मामलों में उसे 10-10 साल सजा दी गई है। दोनों सजाएं अलग-अलग चलेंगी।

सीबीआई के स्पेशल जज का फैसला

सीबीआई के स्पेशल जज जगदीप लोहान ने फैसले में इसका प्रावधान किया है। यानी बाबा को 20 साल जेल में रहना होगा। हालांकि, स्पेशल सीबीआई जज जब फैसला सुना रहे थे राम रहीम बार-बार सात साल-सात साल बोल रहा था।

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सात साल-सात साल की लगाई रट

यानी बाबा को इसका आभास हो गया था कि उसे सजा मिलनी तय है। इसीलिए वह रहम की अपील कर रहा था और न्यूनतम सजा की गुजारिश कर रहा था। लेकिन स्पेशल जज ने बाबा की बात पर कोई ध्यान नहीं दिया।

जेल के खाने की शिकायत की

बताया जा रहा है कि फैसले के बाद राम रहीम ने अपने वकील के जरिए सीबीआई के स्पेशल जज से शिकायत की कि उसे जेल में घटिया खाना दिया जा रहा है। साथ ही कहा कि कोर्ट का फैसला आने के बाद चाय मांगी तो वह भी नहीं मिली।

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कोई वीआईपी ट्रीटमेंट नहीं मिलेगा

इस पर जज ने बचाप पक्ष के वकील से कहा कि राम रहीम के साथ अन्य कैदियों से हटकर वीआईपी व्यवहार नहीं किया जा सकता है। उन्हें वही खाना होगा, जो अन्य कैदियों को मिलता है।

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15-15 लाख रुपये जुर्माना भी

इसके अलावा बाबा पर कोर्ट ने दोनों मामलों में 15-15 लाख रुपये जुर्माना भी लगाया है। इनमें से 14-14 लाख रुपये पीड़ित साध्वियों को दिए जाएंगे। फैसले से पहले जज ने सीबीआई और बचाव पक्ष के वकीलों को अपनी दलील पेश करने के लिए 10-10 मिनट का वक्त दिया था।

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